महाराष्ट्र सरकार ने खरीदी एअर इंडिया बिल्डिंग! 2018 से अटकी थी डील, अब इतने करोड़ में हुआ सौदा – AajTak

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महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई की ऐतिहासिक ‘एअर इंडिया बिल्डिंग’ को खरीद लिया है. राज्य सरकार ने ये सौदा मंगलवार को ‘एयर इंडिया एसेट्स होल्डिंग लिमिटेड’ (AIAHL) के साथ 1,601 करोड़ रुपये में पूरा किया. सरकार की योजना अपने कई उन दफ्तरों को इस इमारत में शिफ्ट करने की है, जो फिलहाल किराए की जगहों पर चल रहे हैं.
लोक निर्माण विभाग (PWD) की योजना इस इमारत का अंदरूनी रेनोवेशन करने की है. विभाग का मकसद इसे एक साल के भीतर इस्तेमाल के लिए पूरी तरह तैयार करना है.
इस इमारत के मिलने से राज्य सरकार को मुख्य सचिवालय ‘मंत्रालय’ के बिल्कुल पास करीब 46,470 वर्ग मीटर की भारी-भरकम जगह मिल जाएगी.
2012 में लगी आग के बाद से हो रही थी जगह की दिक्कत
दरअसल, ‘मंत्रालय’ भवन लंबे समय से जगह की भारी कमी से जूझ रहा है. साल 2012 में मंत्रालय परिसर में लगी एक भीषण आग के बाद से कई विभागों को वहां से हटाना भी पड़ा था. इसके बाद से ही राज्य सरकार ‘मंत्रालय’ और उससे जुड़ी एनेक्सी बिल्डिंग में जगह की किल्लत का सामना कर रही है.
2012 की उस आग के बाद कई सरकारी दफ्तर शहर के अलग-अलग हिस्सों में बिखर गए थे. इनमें से कुछ दफ्तर सचिवालय से काफी दूर हैं, जिसके लिए सरकार को हर महीने भारी-भरकम किराया चुकाना पड़ रहा है.
2018 से चल रही थी बेचने की तैयारी
एअर इंडिया ने अपना मुख्यालय नई दिल्ली शिफ्ट करने के कुछ साल बाद, 2018 में अपना असेट मोनेटाइजेशन प्लान के तहत इस इमारत को बेचने का फैसला किया था. उस समय एयर इंडिया ने इसकी कीमत 2,000 करोड़ रुपये मांगी थी, जबकि महाराष्ट्र सरकार ने 1,400 करोड़ रुपये का ऑफर दिया था. उस दौरान अन्य खरीदारों में ‘जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी’ और  LIC भी शामिल थे. 
जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी ने इसके लिए 1,375 करोड़ रुपये और LIC ने 1,200 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी.
महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे सरकार के सत्ता में आने के बाद, राज्य सरकार ने आखिरकार अपना ऑफर बढ़ाकर 1,601 करोड़ रुपये करने का फैसला किया. इसके साथ ही सरकार ने लीज पर दी गई जमीन के करीब 300 करोड़ रुपये के बकाये को भी माफ कर दिया.
2024 में मंजूर हो गई थी डील
इससे पहले साल 2022 में देवेंद्र फडणवीस ने तत्कालीन केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात की थी. उन्होंने मांग की थी कि इस इमारत की बिक्री में महाराष्ट्र सरकार को प्राथमिकता दी जाए.
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केंद्र सरकार ने साल 2024 में इस बिक्री को अपनी मंजूरी दी थी, जिसके बाद महाराष्ट्र कैबिनेट ने नवंबर 2025 में इस इमारत को खरीदने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी थी. इस अधिग्रहण के बाद अब सरकार का करोड़ों का किराया बचेगा और कामकाज में भी तेजी आएगी.
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