कोयंबटूर की माया राजेश्वरन रेवती ने पुर्तगाल के लागोस में ITF W35 टूर्नामेंट का सिंगल्स खिताब जीत लिया। रविवार को खेले गए फाइनल में उन्होंने स्पेन की 28 साल की सीलिया सरविनो रुइज को 6-4, 6-2 से हराया। इस जीत के साथ 17 साल की माया भारत की सबसे युवा महिला सिंगल्स प्रो चैंपियन बन गईं। उन्होंने यूक्रेन की येलिजवेता कोट्लियार के साथ डबल्स खिताब भी जीता।
दुनिया की 1038वें नंबर की खिलाड़ी माया ने टूर्नामेंट के क्वालीफाइंग राउंड से शुरुआत की थी। वह पूरे टूर्नामेंट में एक भी सेट नहीं हारीं। मुख्य ड्रॉ के पहले राउंड में उन्होंने टॉप सीड जुस्तिना मिकुलस्काइट को पहले सेट में 0-5 से पिछड़ने के बाद हराया था। पुर्तगाल में जीता गया यह उनके करियर का अब तक का सबसे बड़ा खिताब है।
दबाव बढ़ा तो मन में गुनगुनाने लगीं सुबह सुना गाना
फाइनल में पहला सेट जीतने के बाद माया को अपना पहला प्रोफेशनल खिताब जीतने का दबाव महसूस होने लगा था। इसी दौरान उन्हें सुबह सुने एक गाने की धुन याद आई। उन्होंने तनाव कम करने के लिए मन ही मन गाना गुनगुनाना शुरू कर दिया।
माया ने कहा, “मुझे लगा कि मैं बहुत ज्यादा दबाव ले रही हूं। मैंने खुद को बाकी चीजों से अलग किया और तनाव कम करने के लिए मन में गाना गुनगुनाने लगी। इससे मुझे काफी मदद मिली। मैच पॉइंट पर भी मैंने उसे खास पॉइंट की तरह नहीं सोचा। मेरे लिए वह एक सामान्य पॉइंट था।”
उन्होंने कहा, “पहला खिताब हमेशा खास होता है। इस हफ्ते की कई अच्छी यादें मेरे साथ रहेंगी। हालांकि, मुझे यह एक सामान्य टूर्नामेंट जैसा ही लगा, क्योंकि मैं काफी समय से मुकाबलों में हिस्सा ले रही हूं।”
पहले राउंड में 0-5 से पिछड़ने के बाद की वापसी
माया ने टूर्नामेंट में बिना किसी खास उम्मीद के हिस्सा लिया था। मुख्य ड्रॉ के पहले राउंड में वह टॉप सीड जुस्तिना मिकुलस्काइट के खिलाफ पहले सेट में 0-5 से पिछड़ गई थीं। इसके बावजूद उन्होंने वापसी की और मुकाबला जीत लिया।
माया ने कहा, “मैं बिना किसी उम्मीद के आई थी। अंडरडॉग होने के कारण मैंने सिर्फ अपना सर्वश्रेष्ठ खेलने की कोशिश की। प्रो टूर्नामेंट में सभी खिलाड़ी अच्छे स्तर के होते हैं। किसी भी दिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि कौन बेहतर खेलता है। कुल मिलाकर, मैंने अपने विरोधियों से बेहतर टेनिस खेला।”
15 साल की उम्र में WTA रैंकिंग हासिल की थी
माया को भारतीय महिला टेनिस की उभरती प्रतिभाओं में गिना जाता है। 2025 में 15 साल की उम्र में उन्होंने क्वालीफाइंग राउंड से शुरुआत करते हुए मुंबई ओपन के सेमीफाइनल में जगह बनाई थी। यह WTA 125 स्तर का टूर्नामेंट था। इस प्रदर्शन से उन्हें पहली बार WTA रैंकिंग मिली और वह सीधे 642वें स्थान पर पहुंच गईं।
माया ने शुरुआती करियर में स्पेन की राफेल नडाल एकेडमी में ट्रेनिंग ली। कुछ महीने पहले उन्होंने एकेडमी छोड़ दी और अब फ्रांस के कान्स में एलीट टेनिस सेंटर में अभ्यास कर रही हैं। इस सेंटर में फ्रेंच ओपन चैंपियन मिरा एंड्रीवा और पूर्व वर्ल्ड नंबर-1 डेनिल मेदवेदेव भी ट्रेनिंग ले चुके हैं।
जूनियर सर्किट में भी जीते कई खिताब
सीनियर प्रोफेशनल सर्किट में पूरी तरह शिफ्ट होने से पहले माया जूनियर टूर्नामेंट में भी अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। उन्होंने इस साल फ्रांस के बियोलियू-सुर-मेर और जर्मनी के बामबर्ग में J300 टूर्नामेंट जीते। पिछले साल उन्होंने नई दिल्ली में J300 खिताब अपने नाम किया था। पिछले महीने वह ओसाका में J500 टूर्नामेंट के सेमीफाइनल तक पहुंची थीं।
पुर्तगाल में ITF W35 का खिताब उनके करियर की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है। माया ने कहा, “यह तो बस शुरुआत है। पहला खिताब जीतना अच्छा संकेत है, लेकिन मैं नहीं मानती कि इससे सब कुछ बदल जाएगा। इस जीत से मुझे भरोसा मिला है कि मैं बेहतर स्तर पर मुकाबला कर सकती हूं। मैं इस आत्मविश्वास को अगले टूर्नामेंट में लेकर जाऊंगी।”
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