रूस का देसी ‘हीरो’ तैयार! RUS-PE का डिजाइन इजरायली Hero-90 की नकल, अब कारनामे भी जान लीजिए – Zee News

RUS-PE Drone: RUS-PE का डिजाइन, लॉन्च करने का तरीका और ऑपरेशन कॉन्सेप्ट इजरायल की Hero-90 ड्रोन मिसाइल से काफी मिलता-जुलता है. Hero-90 को इजरायली कंपनी UVision बनाती है. इसे सैनिकों के लिए सटीक हमले के हथियार के तौर पर विकसित किया गया है.
RUS-PE Drone: रूसी कंपनी कलाश्निकोव कंसर्न ने एक नया पोर्टेबल ड्रोन स्ट्राइक सिस्टम पेश किया है. इसे इजरायल की Hero-90 लोइटरिंग म्यूनिशन की नकल माना जा रहा है. इस सिस्टम को RUS-PE नाम दिया गया है. जिसे सऊदी अरब के रियाद में होने वाले वर्ल्ड डिफेंस शो में पेश किया जाएगा. RUS-PE का डिजाइन, लॉन्च करने का तरीका और ऑपरेशन कॉन्सेप्ट इजरायल की Hero-90 ड्रोन मिसाइल से काफी मिलता-जुलता है. Hero-90 को इजरायली कंपनी UVision बनाती है. इसे सैनिकों के लिए सटीक हमले के हथियार के तौर पर विकसित किया गया है.
RUS-PE एक मैन-पोर्टेबल सिस्टम है. जिसे कंधे पर ले जाया जा सकता है. यह एक कंटेनर से लॉन्च होने वाली गाइडेड म्यूनिशन है. जो स्थिर और चलते हुए दोनों तरह के टार्गेट पर सटीक हमला कर सकती है. इसका इस्तेमाल अकेले लक्ष्य या छोटे समूहों पर हमले के लिए किया जा सकता है.
इसकी डिजाइन कैसी है?
तकनीकी रूप से RUS-PE में X-शेप का एयरोडायनामिक डिजाइन दिया गया है. इसमें वॉरहेड, ऑनबोर्ड कंट्रोल सिस्टम और एक सीकर हेड लगा है. ड्रोन को ट्रांसपोर्ट-लॉन्च कंटेनर से न्यूमैटिक सिस्टम के जरिए लॉन्च किया जाता है. यह सिस्टम ऑटोमैटिक, सेमी-ऑटोमैटिक और मैनुअल तीनों मोड में काम कर सकता है.
स्पीड कितनी है?
इस ड्रोन में ड्यूल-चैनल, जाइरो-स्टेबलाइज्ड ऑप्टिकल सीकर लगाया गया है. जो स्थिर और चलते लक्ष्यों को पहचान सकता है. इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ऑटोमैटिक टारगेट रिकग्निशन की सुविधा भी दी गई है. कंपनी के मुताबिक RUS-PE करीब 30 मिनट तक उड़ान भर सकता है. इसकी क्रूज स्पीड लगभग 140 किमी प्रति घंटे है.
यह लांच कैसे होती है?
ये सभी खूबियां इजरायल की Hero-90 ड्रोन मिसाइल से काफी मिलती-जुलती बताई जा रही हैं. Hero-90 भी ट्यूब से लॉन्च होती है. टार्गेट एरिया के ऊपर मंडराती है. ऑपरेटर के कंट्रोल में जाकर अंतिम हमला करती है. इस नए सिस्टम की जानकारी ऐसे समय सामने आई है. जब रूस यूक्रेन युद्ध के बीच अपने लोइटरिंग म्यूनिशन पोर्टफोलियो को लगातार बढ़ा रहा है.
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पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते रूस को कई आधुनिक तकनीकों और कंपोनेंट्स तक पहुंच में दिक्कतें आई. ऐसे में विदेशी सिस्टम की नकल जैसे रास्ते अपनाए जाने की चर्चा होती रही है. कलाश्निकोव ने यह नहीं बताया कि RUS-PE में किसी विदेशी तकनीक का लाइसेंस इस्तेमाल हुआ है या नहीं. वहीं Hero-90 बनाने वाली कंपनी UVision ने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.
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सचेंद्र सिंह का ताल्लुक उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से है. इन्होंने अपनी पढ़ाई-लिखाई ‘संगम नगरी’ प्रयागराज में स्थित इलाहाबाद विश्वविद्यालय से की है. पढ़ने और लिखने में इनकी ऐसी रूचि रही कि इन्होंने पत्रकारिता जगत से जुड़कर अपना करियर बनाने की ठान ली. फिलहाल सचेंद्र ज़ी मीडिया समूह से जुड़कर ‘ज़ी भारत : ZEE Bharat’ के डिजिटल प्लेटफॉर्म में अपना योगदान दे रहे हैं. …और पढ़ें
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