वाराणसी, कार्यालय संवाददाता। आगरा मेडिकल कॉलेज में बालरोग विभाग के प्रो. राकेश भाटिया ने कहा कि गर्भस्थ शिशु को रेस्पिरेटरी सिंशियल वायरस (आरएसवी) से बचाने की वैक्सीन का ट्रॉयल जारी है। उनका दावा है कि प्रसव से 14 दिन पहले गर्भवती महिला को यह लगाया जाए तो उसके बच्चे की प्रतिरोधी क्षमता मजबूत होगी। वह निमोनिया समेत कई गंभीर बीमारियों से बचा रहेगा। बताया कि कई देशों में आरएसवी वैक्सीन सफल है। होटल ताज में रविवार को एकेडमिक ऑफ पीडियाट्रिक की ओर से बाल श्वसन रोग आधारित ‘पेड पल्मोकॉन-2026’ के समापन सत्र में प्रो. भाटिया ने कहा कि पांच वर्ष की आयु से कम बच्चों में आरएसवी कह वजह से निमोनिया का खतरा रहता है। अधिकतर बच्चे जन्म लेते ही संक्रमित हो जाते हैं। वे नाक से पानी आने, गले में खरास और बुखार से पीड़ित होते हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रसव से 14 दिन पहले गर्भवती महिला को आरएसवी वैक्सीन लगाएं तो उसके बच्चे को निमोनिया समेत कई श्वास संबंधी बीमारियों का खतरा नहीं रहता है। अध्ययन में आरएसवी वैक्सीन का प्रभाव 69.4 प्रतिशत रहा।
प्रो. भाटिया ने अपना शोधपत्र प्रस्तुत किया। निष्कर्ष यही बताया कि गर्भावस्था में महिला का टीकाकरण बेहद महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम आयोजन सचिव डॉ. अशोक राय रहे। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. डीएम गुप्त और संचालन डॉ. आलोक सी. भारद्वाज ने किया। इस अवसर पर डॉ. राजेंद्र श्रीवास्तव, डॉ. संजय पटेल, डॉ. विजय गुप्त, डॉ. अरुण त्रिपाठी, डॉ. ब्रजेश कुमार और डॉ. संजय पाठक मौजूद थे।
एलर्जी में इम्यूनोथिरेपी कारगर
‘पेड पल्मोकॉन-2026’ में बालरोग विशेषज्ञ डॉ. दिगंत शास्त्री ने कहा कि एलर्जी के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इससे निजात पाने में इम्यूनोथिरेपी कारगर है। कहा कि निमोकोकल वैक्सीन नहीं लगने से बच्चों में खसरे (मीजल्स) का खतरा रहता है। बेंगलुरू के बालरोग विशेषज्ञ डॉ. जगदीश चिनप्पा ने कहा कि बच्चों को दमा से बचाने के लिए दवा के साथ मानसिक सहयोग जरूरी है।
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