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अमेरिका में जन्मी स्पेनिश महिला मारिया ब्रैनेस मोरेर की अगस्त 2024 में 117 साल 168 दिन की उम्र में मौत हुई थी. इससे कुछ समय पहले ही वह दुनिया की सबसे उम्रदराज जीवित महिला बन गई थीं. 24 सितंबर को सेल रिपोर्ट्स मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित एक लेख में शोधकर्ताओं ने ब्रैनेस के खून, लार, मूत्र, मल और जीनोम का अध्ययन किया.
हालांकि वह न तो धूम्रपान करती थीं, न शराब पीती थीं, यहां तक कि जब तक हो सका वो अपने रोजमर्रा के काम भी करती रहीं, वो गांव में रहती थीं, हल्का व्यायाम करती थीं और मेडीटेरेनियन स्टाइल का आहार लेती थीं जिसमें ऑलिव ऑयल (जैतून का तेल) शामिल था. लेकिन ब्रैनेस की जीवनशैली में एक खास बात यह थी कि वह रोजाना तीन बार दही खाती थीं.
दही: लंबी उम्र का नुस्खा
2 अक्टूबर को एक पोस्ट में डॉ. जोसेफ सलहाब ने दही खाने पर बताया कि यह लंबी उम्र के लिए सबसे अच्छा सप्लीमेंट क्यों हो सकता है.
उन्होंने लिखा, ‘दही कोलन कैंसर और कोलन पॉलीप्स का खतरा कम करने, आंत के बैक्टीरिया को मजबूत और स्वस्थ रखने, बेहतर इम्युनिटी और क्रॉनिक डिसीस के खतरे को कम करने से जुड़ा है. आइए जानें कि दही कैसे लंबी उम्र से जुड़ा हो सकता है.
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गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट ने समझाया, ‘यह महिला 117 साल तक जी और वैज्ञानिकों ने उसकी लाइफस्टाइल में इस बात पर ध्यान दिया कि वह रोजाना तीन बार क्या खाती थीं, हालांकि दही कोई जादुई गोली नहीं है जो आपको हमेशा जवान रखेगी लेकिन अध्ययनों से पता चलता है कि यह सबसे फायदेमंद खाद्य पदार्थों में से एक है.’
क्या हेल्दी गट का मतलब क्रॉनिक डिसीस का कम खतरा
गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट के अनुसार, जो लोग नियमित रूप से दही खाते हैं, उनमें कोलन कैंसर और कोलन पॉलीप्स का खतरा कम होता है. इसके अलावा दही खाने से पेट के गुड बैक्टीरिया और हेल्दी होते हैं और बढ़ते हैं जिससे आपकी गट हेल्थ इंप्रूव होती है.
विशेषज्ञ ने बताया कि स्वस्थ और मजबूत आंत बेहतर इम्युनिटी और क्रॉनिक डिसीस के कम खतरे से जुड़ी होती है. उन्होंने कहा, ‘एक डॉक्टर के तौर पर मैं रोजाना दही खाना कभी नहीं भूलता. मैं इसे चिया सीड्स, शहद, डार्क चॉकलेट और ताजे फलों के साथ खाता हूं.’
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