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भारत का एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA), एक परियोजना है, जिसे भारतीय वायुसेना और नौसेना के लिए विकसित किया जा रहा है. यह एकल-सीट, ट्विन-इंजन, हर मौसम में काम करने वाला, 5th जेनरेशन का स्टील्थ और मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट होगा. इसका डिजाइन रक्षा मंत्रालय के अधीनस्थ एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) द्वारा किया जा रहा है. योजना है कि इस लड़ाकू विमान का बड़े पैमाने पर उत्पादन साल 2035 से शुरू किया जाए.
यह विमान कई तरह के मिशन पूरे करने में सक्षम होगा, जो एयर सुप्रीमेसी (हवाई वर्चस्व), ग्राउंड स्ट्राइक (जमीन पर हमला), दुश्मन की एयर डिफेंस को दबाना, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर ऑपरेशन की क्षमता से परिपूर्ण होगा.
इस विमान को विशेष रूप से सुखोई-30 एमकेआई की जगह लेने के लिए तैयार किया जा रहा है, जो अभी भारतीय वायुसेना की रीढ़ मानी जाती है. AMCA का डिजाइन इस तरह तैयार किया जा रहा है कि इसका रडार पर पकड़ना बेहद मुश्किल (लो रडार क्रॉस सेक्शन) हो और यह सुपरक्रूज़ क्षमता से लैस हो.
फरवरी 2025 तक AMCA का प्रोटोटाइप डेवलपमेंट फेज जारी ह चुका है. इससे पहले इसकी व्यवहार्यता अध्ययन, प्रारंभिक डिजाइन और विस्तृत डिजाइन प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है. यह फिलहाल भारत में विकसित होने वाला एकमात्र पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट है.
AMCA कार्यक्रम की शुरुआत 2010 में हुई थी. इसे पहले मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (MCA) नाम से जाना जाता था. यह परियोजना भारत-रूस के संयुक्त सुखोई/HAL FGFA प्रोग्राम के समानांतर शुरू हुई थी.
शुरू में इसे 20 टन श्रेणी के विमान के रूप में देखा गया था, लेकिन अब इसे 25 टन श्रेणी का फाइटर जेट बनाया जा रहा है.
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