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हिन्दी भाषा, भारत की जीवन्त सांस्कृतिक पहचान की पर्याय है, जिसने भौगोलिक सीमाओं को पार करते हुए, विविधतापूर्ण दृष्टिकोणों और विभिन्न समुदायों, संस्कृतियों व विरासतों को आपस में जोड़ने में एक सूत्रधार की भूमिका निभाई है. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई मिशन ने विश्व हिन्दी दिवस के सिलसिले में सोमवार को एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जिसमें हिन्दी के भाषाई और सांस्कृतिक महत्व पर चर्चा हुई.
हर वर्ष, 10 जनवरी को मनाए जाने वाले ‘विश्व हिन्दी दिवस’ का मुख्य उद्देश्य, हिन्दी भाषा के बारे में जागरूकता का प्रसार करना, इसके उपयोग को बढ़ावा देना और इस भाषा में विद्वानों व लेखकों के योगदान को वैश्विक स्तर पर रेखांकित करना है.
हिन्दी, भारत में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है, जिसे लगभग 45 करोड़ लोग मातृभाषा के रूप में बोलते हैं. विश्व स्तर पर लगभग 70 करोड़ से अधिक लोग हिन्दी बोलते, समझते या सीखते हैं.
हिन्दी भाषा, अंग्रेज़ी और चीनी भाषा के बाद, दुनिया के सबसे बड़े भाषाई समूहों में से एक है.
वर्ष 2026 के लिए विश्व हिन्दी दिवस की थीम है: “पारम्परिक ज्ञान से कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक”.
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई मिशन की स्थाई उप प्रतिनिधि राजदूत योजना पटेल ने इस कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह विषय दर्शाता है कि हिन्दी भाषा, अपनी सांस्कृतिक जड़ों को बनाए रखते हुए कोडिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल मंचों के माध्यम से किस प्रकार से एकीकृत हो रही है.
उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया, भाषा के विकास को उजागर करती है, जो समृद्ध सांस्कृतिक, साहित्यिक और पारम्परिक विरासत को सहेजते हुए, डिजिटल नवाचार की दिशा में आगे बढ़ रही है.
राजदूत योजना पटेल ने कहा कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्रों में प्रगति के लिए यह आवश्यक है कि भाषाई और तकनीकी ढाँचों को आपस में जोड़ा जाए, ताकि अपनी मातृभाषा में वैश्विक डिजिटल मंचों पर पहचान बनाई जा सके.
इस अवसर पर, भारत की महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने अपने सम्बोधन में हिन्दी भाषा के वैश्विक प्रचार-प्रसार तथा प्रवासी भारतीय समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला.
उन्होंने कहा कि तकनीकी युग के अनुरूप हिन्दी को युवा पीढ़ी के लिए अधिक सुलभ बनाया जाना आवश्यक है, जिससे वैश्विक स्तर पर इसकी स्वीकार्यता और अधिक सशक्त हो सके.
उनके अनुसार, तकनीकी युग में हिन्दी भाषा को सरल, उपयोगी और व्यवहारिक बनाने की दिशा में निरन्तर प्रयास किए जाने होंगे.
इस कार्यक्रम में, संयुक्त राष्ट्र में नेपाल के स्थाई प्रतिनिधि राजदूत लोक बहादुर थापा, मॉरिशस के स्थाई प्रतिनिधि राजदूत मिलान जया मीटराभन, गयाना की उप स्थाई प्रतिनिधि राजदूत त्रिशला सिमन्तिनी परसॉद ने भी शिरकत की.
भारत के अलावा, फ़िजी, सूरीनाम, त्रिनिदाद, केनया, यूगांडा, तंज़ानिया, बांग्लादेश, नेपाल जैसे देशों में भी हिन्दी काफ़ी व्यापक दायरे में बोली और समझी जाती है.
ग़ौरतलब है कि विश्व हिन्दी सचिवालय मॉरीशस में स्थित है.
भारत सरकार ने वर्ष 2006 में अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी के प्रचार-प्रसार को और बल देने के लिए हर साल, 10 जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस के रूप में मनाए जाने का निर्णय लिया था.
संयुक्त राष्ट्र महासभा में, पहली बार 1949 में हिन्दी भाषा का प्रयोग हुआ था.
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