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नेपाल सरकार ने सभी प्रकार के सार्वजनिक वाहनों के नए रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाने का फैसला किया है. बालेन शाह की सरकार ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है, जब देश में ईंधन संकट और बढ़ती पेट्रोलियम निर्भरता को लेकर चिंता बढ़ रही है.
नेपाल के ट्रांसपोर्ट विभाग ने वैसे तो बढ़ते ट्रैफिक जाम, वायु प्रदूषण और सड़कों पर बढ़ते दबाव को आधिकारिक कारण बताया है, लेकिन जानकार इस निर्णय को संभावित तेल आपूर्ति संकट की तैयारी से भी जोड़कर देख रहे हैं.
ट्रांसपोर्ट विभाग के आदेश में केवल पेट्रोल और डीजल से चलने वाले ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक सार्वजनिक वाहनों के नए पंजीकरण पर भी रोक लगाने का निर्देश दिया गया है. इससे चर्चा और तेज हो गई है कि सरकार सार्वजनिक यातायात क्षेत्र में अनियंत्रित विस्तार रोककर मौजूदा संसाधनों के व्यवस्थापन पर ध्यान देना चाहती है.
विभाग के निदेशक मणि राम भुसाल द्वारा जारी पत्र देश के सात प्रांतों के संबंधित मंत्रालयों और स्थानीय निकायों को भेजा गया है. इसमें कहा गया है कि सार्वजनिक यातायात का वैज्ञानिक प्रबंधन न हो पाना, अत्यधिक वायु प्रदूषण, वाहनों का दबाव, ट्रैफिक जाम और ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण सार्वजनिक यातायात संचालन कठिन होता जा रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव और आपूर्ति को लेकर बढ़ती अनिश्चितता का असर नेपाल जैसे आयात-निर्भर देशों पर सीधे पड़ रहा है. ऐसे में सार्वजनिक वाहनों की संख्या नियंत्रित करने का कदम भविष्य में ईंधन खपत कम करने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है.
ट्रांसपोर्ट विभाग ने वाहन तथा यातायात व्यवस्था कानून की धारा 24 की उपधारा (3) के तहत मिले अधिकार का प्रयोग करते हुए यह निर्णय लिया है. कानून के अनुसार, पर्यावरण प्रदूषण, सड़क पर अत्यधिक दबाव या आवागमन में कठिनाई की स्थिति में सार्वजनिक हित के लिए वाहन पंजीकरण रोका जा सकता है.
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