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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े कथित वायरल वीडियो विवाद में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है. मुख्यमंत्री ने अब एक नई मास्क थ्योरी पेश करते हुए दावा किया है कि वायरल वीडियो में दिख रहा शख्स वह नहीं, बल्कि उनके चेहरे का मास्क पहनने वाला कोई दूसरा शख्स है. मुख्यमंत्री का कहना है कि यह पूरी साजिश उनकी छवि खराब करने के लिए रची गई है. हालांकि उनके इस दावे को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, विपक्षी दलों और विवाद से जुड़े अन्य लोगों ने तुरंत खारिज कर दिया है. इसी के साथ यह मामला अब वीडियो से ज्यादा मुख्यमंत्री के बदलते दावों को लेकर चर्चा में आ गया है.
गुरुवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भगवंत मान ने एक वीडियो दिखाया और दावा किया कि उसमें दिख रहा शख्स उनके चेहरे का मास्क पहने हुए है. उन्होंने कहा कि वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की लंबाई उनसे करीब दो इंच ज्यादा है. उसकी चाल, खड़े होने का तरीका और शरीर की बनावट भी उनसे अलग है.
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उनके चेहरे पर सर्जरी का एक निशान है, जो वीडियो में दिखाई नहीं देता. उन्होंने दावा किया कि गर्दन के पास मास्क की लाइन साफ नजर आती है और कान के पास मास्क की सिलवट भी देखी जा सकती है. उनका कहना था कि वीडियो में व्यक्ति ने आंखों को छिपाने के लिए गॉगल्स लगाए हुए हैं. मुख्यमंत्री ने एक अन्य क्लिप का भी जिक्र किया, जिसमें उनके अनुसार कनाडा निवासी जगमन समरा उनके चेहरे का मास्क हाथ में पकड़े दिखाई देता है.
भगवंत मान के बदलते दावों ने बढ़ाया विवाद
भगवंत मान ने दावा किया कि कनाडा में रहने वाला जगमन समरा उन्हें ब्लैकमेल करता रहा है और उसी ने उनकी छवि खराब करने के लिए ऐसे वीडियो तैयार करवाए. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सिर्फ उनका ही नहीं बल्कि अन्य नेताओं के चेहरे के मास्क भी तैयार किए गए हैं. वहीं, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मनन ने मुख्यमंत्री की मास्क थ्योरी को खारिज कर दिया. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वीडियो फर्जी था तो फिर गुरुग्राम जाकर करीब 10 लाख रुपये खर्च कर फोरेंसिक रिपोर्ट लेने की जरूरत क्यों पड़ी. उन्होंने यह भी पूछा कि यदि मुख्यमंत्री अपने दावे पर इतने आश्वस्त थे तो पहले ही वीडियो की जांच क्यों नहीं करवाई गई.
एसजीपीसी का कहना है कि जब अकाल तख्त ने वीडियो की जांच करवाई तो मुख्यमंत्री ने उसे स्वीकार नहीं किया. उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान और मंत्री हरपाल चीमा के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग भी की. यह विवाद वर्ष 2025 के आखिर में वायरल हुए एक वीडियो से शुरू हुआ था. वीडियो में एक व्यक्ति गुरुओं की तस्वीर पर कथित तौर पर शराब छिड़कता दिखाई देता है. कनाडा के जगमन समरा ने दावा किया था कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति भगवंत मान हैं। इसके बाद पंजाब में बड़ा विवाद खड़ा हो गया.
15 जनवरी को अकाल तख्त ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को तलब किया. उस समय मुख्यमंत्री ने कहा था कि वीडियो एआई से बनाया गया है. 15 जून को अकाल तख्त की ओर से कहा गया कि कराई गई फोरेंसिक जांच में वीडियो एआई जनरेटेड नहीं पाया गया. इसके बाद अकाल तख्त ने भगवंत मान के सामाजिक बहिष्कार की अपील की और उन्हें ‘गुरु दोखी’ घोषित किया.
18 जून को पंजाब सरकार की ओर से एक दूसरी फोरेंसिक रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें दावा किया गया कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति भगवंत मान नहीं हैं. इसके कुछ समय बाद हरियाणा पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार करते हुए दावा किया कि गुरुग्राम में कथित तौर पर 10 लाख रुपये देकर फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार कराई गई. मुख्यमंत्री ने उस समय इसे भाजपा सरकार की साजिश बताया था.
विपक्ष ने भगवंत मान के नए दावे पर उठाए सवाल
अब 25 जून को मुख्यमंत्री ने एक और वीडियो दिखाते हुए नया दावा किया है कि वायरल वीडियो में उनके चेहरे का मास्क इस्तेमाल किया गया था. मुख्यमंत्री के ताजा बयान के बाद विपक्ष ने कहा है कि पहले वीडियो को एआई बताया गया, फिर कहा गया कि वीडियो में व्यक्ति कोई और है और अब मास्क की बात कही जा रही है. विपक्ष का सवाल है कि यदि मास्क का इस्तेमाल हुआ था तो अब तक सामने आई किसी भी फोरेंसिक रिपोर्ट में इसका उल्लेख क्यों नहीं किया गया. इसी वजह से पूरे मामले में बहस अब सिर्फ वायरल वीडियो पर नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री के बदलते दावों पर केंद्रित हो गई है.
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