एमएसएमई ने जीएसटी सुधारों को सराहा, नकदी प्रवाह बढ़ाने पर जोर – Live Hindustan

भारत के आर्थिक विकास, निर्यात और रोजगार में अहम भूमिका निभाने वाले एमएसएमई अब जीएसटी को सिर्फ अनुपालन नहीं, बल्कि औपचारिकता और परिचालन दक्षता का माध्यम मान रहे हैं। डेलॉइट इंडिया के ‘जीएसटी 2.0: द नेक्स्ट फेज’ सर्वे के मुताबिक, एमएसएमई अब ‘अपनाने से अनुकूलन’ की ओर बढ़ रहे हैं और नकदी सुधार व अनुपालन सरलीकरण के पक्ष में हैं। डेलॉइट साउथ एशिया के प्रेसिडेंट टैक्स गोकुल चौधरी ने कहा कि एमएसएमई कुल उत्पादन का एक-तिहाई और निर्यात का आधा हिस्सा देते हैं। जीएसटी सप्लाई चेन और पारदर्शी इकोसिस्टम का उत्प्रेरक है। अगली पीढ़ी के सुधारों में रिफंड सुधार, इनपुट टैक्स क्रेडिट नियम सरल करना और क्रेडिट का निर्बाध उपयोग जरूरी है।

डेलॉइट इंडिया के इनडायरेक्ट टैक्स लीडर महेश जय सिंह ने बताया, 69% एमएसएमई इनपुट सेवाओं-पूंजीगत वस्तुओं तक इनवर्टेड ड्यूटी रिफंड विस्तार चाहते हैं। 63% जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाने के पक्ष में हैं। 51% साल के अंत में संचित आईटीसी रिफंड और 49% पिछली अवधियों के अनंतिम रिफंड चाहते हैं। सर्वे में 89% ने विलंबित रिफंड पर स्वतः ब्याज, 88% ने इनवॉइस आधारित आईटीसी पात्रता और 87% ने तिमाही कर भुगतान का समर्थन किया। तिमाही रिटर्न फाइलिंग की मांग 2023 में 12% से बढ़कर 2026 में 67% हो गई। इसके अलावा 72% केंद्रीयकृत ऑडिट प्रणाली, 70% आईटीसी से रिवर्स चार्ज देनदारी भुगतान और 64% सरल जीएसटी दर व्यवस्था चाहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जीएसटी सुधारों का अगला चरण 10 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य में एमएसएमई को निवेश, नवाचार और विस्तार के लिए सशक्त बनाएगा।

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