बदलाव: सबांग बंदरगाह के जरिए स्ट्रेट ऑफ मलक्का में बढ़ेंगी भारतीय गतविधियां – Hindustan

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंडोनेशिया दौरे के दौरान दोनों देश रणनीतिक रूप से अहम सबांग बंदरगाह को विकसित करने का फैसला किया है, ये सीधे समुद्री जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ मलक्का से जुड़ा है। सबांग बंदरगाह भारत के ग्रेट निकोबार बंदरगाह परियोजना से करीब 160 किलोमीटर दूर है। अनुमान है कि सबांग बंदरगाह के जरिए मलक्का में भारतीय गतविधियां बढ़ेंगी। सबांग में कुल पांच द्वीप हैं। स्ट्रेट ऑफ मल्क्का समुद्री मार्ग करीब 900 किलोमीटर लंबा है। ये मलय प्रायद्वीप से उत्तरपूर्व और इंडोनेशिया के दक्षिण पश्चिमी द्वीप सुमात्रा तक 65 से 250 किलोमीटर तक चौड़ा है। ये समुद्री मार्ग हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर (प्रशांत महासागर) को जोड़ता है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और इराक का तेल सबसे ज्यादा इस रास्ते से गुजरता है। मलक्का के रास्ते से हर साल करीब 2800 अरब डॉलर का माल गुजरता है。
सबांग इंडोनेशिया की सबसे कम आबादी वाला शहर है। सबांग करीब 122 स्कवॉयर किलोमीटर में फैला है। सबांग 1963 में इंडोनेशिया का स्वतंत्र बंदरगाह बना। वर्ष 2000 में सबांग को फ्री ट्रेड जोन घोषित किया गया। सबांग भारत, मलेशिया और थाईलैंड के साथ सीमा साझा करता है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारत के लिए ये मार्ग आर्थिक और रणनीतिक लिहाज से अहम हो सकता है। भारत के पेट्रोलियम उत्पादों, कोयला, मशीनरी और कंटेनर व्यापार को नई दिशा मिल सकती है। साथ ही एक्ट ईस्ट पॉलिसी कके तहत दक्षिण पूर्व एशिया से संपर्क को मजबूत बनाने का माध्यम हो सकता है।
ये समुद्री मार्ग भारत और हिंद महासागर क्षेत्र के लिए पोतों के परिवहन का केंद्र बिंदु है। सालाना इस मार्ग से एक लाख से अधिक पोत गुजते हैं। दुनिया भर का 25 फीसदी उत्पाद इसी रास्ते से गुजरता है। इसमें तेल के साथ चीन निर्मित उत्पादों के अलावा कोयला, पाम ऑयल और इंडोनेशिया की कॉफी शामिल है।
वर्ल्ड ओसन रिव्यू के अनुसार वर्ष 2011 में ये आंकड़ा 1.52 करोड़ बैरल हो गया था। मौजूदा समय में रोज 2.3 करोड़ बैरल तेल इस रास्ते से चीन, जापान और दक्षिण कोरिया को जाता है।रोजाना एलएनजी से लदे 25 सुपर टैंकर भी इस मार्ग से दूसरे देशों के लिए निकलते हैं।
समुद्री मार्ग मलक्का चीन की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए सबसे अहम है। हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर को जोड़ने वाला इस संकरे समुद्री मार्ग से पश्चिम एशिया और अफ्रीका से तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा चीन पहुंचता है।
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