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उत्तर प्रदेश के बांदा में सात वर्षीय बच्ची के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में अदालत ने सख्त फैसला सुनाया है. कमासिन थाना क्षेत्र में हुई इस दिल दहला देने वाली वारदात के आरोपी को कोर्ट ने दोषी करार देते हुए 20 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है. अदालत ने आरोपी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसकी राशि पीड़िता को दी जाएगी.
दरअसल, यह मामला मई 2023 का है, जब 40 वर्षीय आरोपी तीरथ ने सात साल की बच्ची को बहला-फुसलाकर अगवा कर लिया था. आरोप है कि वह बच्ची को जंगल में ले गया, जहां उसके साथ दुष्कर्म किया. विरोध करने पर आरोपी ने बच्ची के साथ बेरहमी से मारपीट भी की.
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वारदात के बाद परिजनों ने पुलिस को सूचना दी. पुलिस ने तत्काल अपहरण और दुष्कर्म समेत पॉक्सो की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर बच्ची की तलाश शुरू की. कुछ समय बाद बच्ची बरामद हुई. उसकी हालत गंभीर होने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया.
पीड़िता ने अदालत में सुनाई आपबीती
मुकदमे की सुनवाई के दौरान पीड़ित बच्ची ने अदालत के सामने अपने साथ हुई पूरी घटना का सिलसिलेवार बयान दिया. उसने बताया कि आरोपी ने उसे धमकाया, विरोध करने पर पीटा और जबरन दुष्कर्म किया.
पुलिस ने जांच पूरी कर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया. अभियोजन पक्ष ने मामले में सात गवाह पेश किए. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया.
इस मुकदमे की सुनवाई के दौरान कुल 26 तारीखें पड़ीं और बीच में दो न्यायाधीश भी बदले गए. हालांकि वारदात के बाद से आरोपी लगातार जेल में बंद रहा और उसे जमानत नहीं मिली.
सरकारी वकील ने बताई सजा की वजह
सरकारी अधिवक्ता कमल सिंह गौतम ने बताया कि पुलिस ने अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो कानून समेत अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर मजबूत साक्ष्यों के आधार पर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया.
उन्होंने बताया कि सात गवाहों की गवाही और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए 20 साल की कठोर कैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई. अदालत ने जुर्माने की राशि पीड़िता को देने का भी आदेश दिया है.
एसपी बोले- अपराध करने वालों को नहीं मिलेगी राहत
बांदा के एसपी पलाश बंसल ने कहा कि महिला और बच्चों से जुड़े अपराधों में पुलिस तेजी से विवेचना कर आरोपियों को जल्द सजा दिलाने के लिए लगातार काम कर रही है.
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा. पुलिस का उद्देश्य है कि मजबूत विवेचना और प्रभावी पैरवी के जरिए दोषियों को कानून के मुताबिक कड़ी सजा दिलाई जाए.
इस फैसले के साथ एक बार फिर यह संदेश गया है कि बच्चों के खिलाफ जघन्य अपराध करने वालों के प्रति अदालत और कानून दोनों सख्त रुख अपना रहे हैं.
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