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अहमदाबाद में मैंने देखा कांग्रेस बीजेपी और युवाओं में उबाल था. कांग्रेस की आक्रोश रैली के खिलाफ बीजेपी का कांग्रेस मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन हुआ, तो युवाओं ने शाम के समय दो घंटे तक पुलिस को हैरान कर दिया.
22 जुलाई के दिन सुबह मुझे पता चला कि, 11 बजे कांग्रेस मुख्यालय से प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में आक्रोश रैली का आयोजन हो रहा है. इसे लेकर सुबह तक कोई आधिकारिक घोषणा तो नहीं की गई थी. लेकिन इस आक्रोश रैली की पुष्टि करने के बाद 10.30 बजे तक मैं अहमदाबाद के पालड़ी में स्थित कांग्रेस मुख्यालय पहुंचा.
कांग्रेस मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा समेत नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे. पुलिस को भी इस आक्रोश रैली की भनक लग चुकी थी. बिना पुलिस परमिशन के कांग्रेस की इस रैली का आयोजन हो रहा था. ऐसे में कांग्रेसी मुख्यालय के आसपास पुलिस तैनात थी.
मेरे साथ कुछ कांग्रेस के नेता मुख्यालय के बाहर मौजूद थे. मैंने देखा कि करीब 11.10 बजे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की अगुवाई में आक्रोश रैली शुरू हुई. हाथ में बैनर लिए, सरकार के खिलाफ नारेबाजी के साथ कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता मुख्यालय के बाहर आने लगे.
पीएम और गृहमंत्री को माफी मांगनी होगी- चावड़ा
बाहर आते ही पहले तो प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा ने मीडिया इंटरव्यू दिया. उसके बाद आजतक से खास बातचीत में कहा, ‘छात्रों की मांग सरकार को सुननी पड़ेगी. धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना होगा. छात्रों पर लाठीचार्ज और नेता विपक्ष राहुल गांधी के साथ जो रवैया पीएम आवास के बाहर हुआ है, उसे लेकर पीएम और गृहमंत्री को माफी मांगनी होगी.’
मैंने देखा कि मेरे साथ बातचीत करने के तुरंत बाद जैसे ही रैली कांग्रेस मुख्यालय से आगे बढ़ी की तुरंत पुलिस ने सबको रोकना शुरू किया. जब कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता नहीं रुके तो पुलिस के साथ संघर्ष शुरू हुआ. उस समय जो दिखा, वो ये था कि अमित चावड़ा समेत कुछ नेता सड़क पर बैठ गए तो कुछ कांग्रेस के नेता पुलिस वैन पर चढ़कर नारेबाजी करने लगे.
हालांकि बाद में थोड़े बहुत संघर्ष, खींचातानी के बाद सभी को हिरासत में लिया गया. लेकिन इसके बाद बीजेपी ने कांग्रेस मुख्यालय के बाहर 2 बजे धरना प्रदर्शन का ऐलान कर दिया.
2,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती
बीजेपी के धरना प्रदर्शन को लेकर मैंने 1.30 बजे देखा कि कांग्रेस मुख्यालय तक आनेवाली तीन अलग अलग सड़कों पर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई थी. मौके पर मौजूद डीसीपी जितेंद्र अग्रवाल से मैंने बात की. उन्होंने कहा, ‘पिछली बार इसी कांग्रेस मुख्यालय के बाहर बीजेपी और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच पथराव हुआ था. तो इस बार ऐसी कोई घटना ना हो इसलिए पुलिस अलर्ट है. 2,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है.’
इतना ही नहीं, मैंने देखा कि पुलिस ने निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया. एहतियात के तौर पर वाटर कैनन और कांग्रेस मुख्यालय के आसपास तीन लेयर में तगड़ी बैरिकेडिंग की गई. दूसरी तरफ मैंने देखा की 1.40 बजे के आसपास पुलिस के अधिकारी कांग्रेस मुख्यालय में जाते है. नेताओं से बातचीत करके बीजेपी के प्रदर्शन के दौरान मुख्यालय से बाहर नहीं आने की अपील की जाती है. जिसे लेकर पहले तो थोड़ा विवाद होता है बाद के पुलिस कांग्रेस के नेताओं को समझाने में सफल रहती है.
अब घड़ी में 2 बजने की तैयारी थी. मेरी नजर आखिरी बैरिकेडिंग की तरफ गई, जहां दो डीजे दिखाई दिए. शुरुआत में सोचा कि धरना प्रदर्शन में डीजे का क्या काम? लेकिन ये बीजेपी की तैयारी का हिस्सा था. 2 बजते ही बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने डीजे जैसे ही बजाया, कांग्रेस मुख्यालय में बैठे नेताओं को ये हरकत रास नहीं आई. तुरंत कांग्रेस ने आपत्ति जताते हुए डीजे बंद करवाने के लिए पुलिस अधिकारी से अपील की, जो कि उस समय के लिए मान ली गई.
हर एक मूवमेंट पर ड्रोन कैमरे से नजर
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा कांग्रेस मुख्यालय के पास आ पहुंचे. मैंने देखा तो समय 2.30 मिनट हो रहा था. सभी बीजेपी कार्यकर्ताओं के हाथ में बैनर और सिर पर टोपी थी. अब बीजेपी का धरना प्रदर्शन शुरू होना था. इसके साथ ही डीजे एक बार दोबारा शुरू कर दिया गया. इस दौरान हर एक मूवमेंट पर ड्रोन कैमरे से नजर रखी जा रही थी. आसपास की छतों पर भी पुलिस जवानों की तैनाती मैंने देखी.
बीजेपी के नेता-कार्यकर्ता जैसे ही बैरिकेडिंग पर पहुंचे, शुरुआत में कुछ मिनट पुलिस और कार्यकर्ताओं में सामान्य संघर्ष हुआ लेकिन आधे घंटे तक बीजेपी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने माहौल गर्म कर दिया. पुलिस बैरिकेडिंग के दूसरी तरफ खड़ी रहकर वक्त बीतने का इंतजार करती रही. 3.30 बजे के आसपास बीजेपी ने घोषणा कर दी कि ‘हमारा शांतिपूर्ण धरना अब खत्म हुआ.’
22 जुलाई को मैंने देखा कि सुबह और दोपहर में राज्य के दो मुख्य राजनीतिक दल के प्रदर्शन में मौजूद रहने के बाद कई पुलिसकर्मियों को गुजरात यूनिवर्सिटी भेज दिया गया. अब यहां शाम को आने वाले थे: Gen-Z, जो दिल्ली में चल रहे धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करने वाले थे.
6 बजे के बाद से ही एक साथ तो नहीं लेकिन रुककर कर अलग अलग ग्रुप में कुछ युवा हाथ में बैनर तो कुछ फूल, चॉकलेट लेकर आने शुरू हुए. जैसे ही ऐसे युवा पुलिस को दिखते, तुरंत उन्हें हिरासत में ले लिया जाता. लेकिन प्रधान का इस्तीफा मांगने वाले इन युवाओं के साथ पुलिस ने कोई दुर्व्यवहार ना करके उन्हें समझाकर डिटेन किया. पुलिस स्टेशन ले जाकर उन्हें चाय तक पिलाई.
पिता ने सुनाई आपबीती
अब शनिवार के दिन धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो चुका है और शिक्षा मंत्रालय की कमान उसी रात प्रह्लाद जोशी को सौंप दी गई है. लेकिन दिल्ली में हुए Gen-Z आंदोलन और उसकी सफलता को लेकर मैंने बात की कहान पटेल के पिता प्रशांत पटेल से. कहान, जो कि NEET की परीक्षा दे चुका था, लेकिन पेपर लीक होने से परेशान था. कहान ने मानसिक परेशानी के चलते सुसाइड किया था.
कहान के पिता ने मुझसे टेलीफोनिक बातचीत में कहा, ‘मेरे बेटे ने दो साल से सबकुछ छोड़कर पूरा ध्यान सिर्फ किताबों में केंद्रित कर लिया था. लेकिन NEET की परीक्षा रद्द होने के बाद से वो परेशान था और हमेशा उसके मन में ये सवाल रहता कि पेपर कैसे लीक हो सकता है. कहान का पिता होने के नाते कह सकता हूं कि वो कभी गुस्सा तक नहीं करता था. हमें कहीं जाना होता तो पढ़ाई के आगे वो साथ चलने तक से इनकार कर देता था. पढ़ाई एकमात्र उसका लक्ष्य रहा था.’
प्रशांत पटेल ने मुझसे कहा, ‘बेटे को खोया है. लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से राहत मिली है. जिस तरह से युवाओं ने सरकार को मजबूर किया, युवाओं को सुनना पड़ा. जिसके बाद धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया, इससे संतुष्ट हूं. लेकिन मुआवजा जैसी बातों से क्या ही फर्क पड़ेगा. बेटा लौटकर नहीं आने वाला है. तो मुआवजे की बात करने का भी कोई मतलब नहीं है.’
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‘युवाओं को खदेड़ा गया लेकिन वो हारे नहीं’
उन्होंने आगे कहा कि जब से दिल्ली में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर आंदोलन शुरू हुआ, उसके बाद पहले 28 जून को मैं दिल्ली गया था. उसके बाद 19 जुलाई को गया था, 20 जुलाई के दिन भी दिल्ली में था. बाद में 21 जुलाई को वापिस अहमदाबाद लौटा और अभी सूरत में हूं. लेकिन मुझे खुशी है कि जिस तरह से युवाओं ने सरकार को संदेश दिया और संयमित होकर आंदोलन चलाया और सफलता मिली है. आज की पीढ़ी को मैंने देखा है,
पटेल ने कहा, ‘वो (आज की पीढ़ी) लड़ना जानती है. युवाओं को खदेड़ा गया लेकिन वो हारे नहीं. जो काम विपक्ष को करना था, वो उनसे हुआ नहीं, तो युवाओं ने कर दिखाया है.’
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