41 साल पुराने कनिष्क बम धमाके की जांच बंद करने की तैयारी? पीड़ित परिवारों ने किया विरोध – aajtak.in

Feedback
1985 के एअर इंडिया कनिष्क बम धमाके की जांच को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. पीड़ित परिवारों ने जांच को कमजोर करने या बंद करने की किसी भी कोशिश का विरोध किया है. 
परिवारों का कहना है कि रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) जांच टीम को छोटा करने और केस को ‘इनएक्टिव’ करने पर विचार कर रही है. इस खबर के बाद पीड़ित परिवारों में नाराजगी है.
दरअसल, कनिष्क बम धमाका 23 जून 1985 को हुआ था. एअर इंडिया की फ्लाइट 182 में बीच हवा में बम धमाका हुआ था. इस हमले में विमान में सवार सभी 329 लोगों की मौत हो गई थी. यह कनाडा के इतिहास के सबसे घातक आतंकी हमलों में से एक है.
‘जांच बंद करने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं करेंगे’
कनिष्क फाउंडेशन के चेयरमैन संजय लाजर ने जांच को बंद करने की किसी भी संभावना का कड़ा विरोध किया है. लाजर खुद इस हमले में अपने माता-पिता और छोटी बहन को खो चुके हैं. उन्होंने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को 16 सितंबर को लेटर लिखा.
I wrote to the @CanadianPM & @PMOIndia @narendramodi @MarkJCarney on the controversial
recent proposal by @rcmpgrcpolice
to consider scaling down the investigation into #AirIndia #Kanishka bombing and make it an inactive case.

We have strongly objected to the proposal &… pic.twitter.com/oo6qgmHnKm
लाजर ने पत्र में कहा कि उन्हें जांच को लेकर हुई एक बैठक में RCMP के संभावित कदम की जानकारी मिली. जांच टीम को छोटा करने और मामले को ‘इनएक्टिव’ स्थिति में डालने की बात कही गई. लाजर ने साफ कहा कि वह जांच को बंद करने या खत्म करने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं करेंगे.
चेयरमैन संजय लाजर ने जांच से जुड़े कई सवाल भी उठाए हैं. उन्होंने कहा कि मामले में कुछ सबूत गायब हैं. कुछ निगरानी रिकॉर्डिंग डिलीट हो चुकी हैं. कई गवाहों की भी मौत हो चुकी है. कुछ गवाहों को धमकियों का सामना करना पड़ा था. ऐसे में जांच को बंद करना सही नहीं होगा.
उन्होंने कहा कि पहले जांच को अंजाम तक पहुंचाने का भरोसा दिया गया था. इसलिए मामले को सिर्फ इसलिए बंद नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि नए सुराग सामने नहीं आ रहे हैं. अभी भी कई सवालों के जवाब बाकी हैं.
यह भी पढ़ें: भोपाल से दिल्ली जा रही एअर इंडिया फ्लाइट की जयपुर में इमरजेंसी लैंडिंग, तकनीकी खराबी के बाद डायवर्ट
10 लाख डॉलर के इनाम को बढ़ाने की मांग
संजय लाजर ने जांच को फिर से मजबूत करने की मांग की है. उन्होंने 1995 में घोषित 10 लाख डॉलर के इनाम को दोबारा शुरू करने की अपील की है. साथ ही उन्होंने इनाम की रकम बढ़ाने की भी मांग की है.
लाजर ने कहा कि अगर मौजूदा जांच टीम आगे काम नहीं कर सकती, तो नई जांच स्टैटजी अपनाई जानी चाहिए. मामले में नए तरीके से सुराग तलाशने की जरूरत है. उन्होंने कनाडा की पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों से जांच जारी रखने की अपील की है.
लाजर ने अपना पत्र कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को भेजा है. इसकी कॉपी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी भेजी गई है. इसके अलावा दोनों देशों के विदेश मंत्रियों और कनाडा के वरिष्ठ अधिकारियों को भी पत्र की कॉपी दी गई है.
पीड़ित परिवार लंबे समय से इस मामले में जवाब चाहते हैं. उनका कहना है कि इतने बड़े हमले की जांच को खत्म करने के बजाय बचे हुए सवालों पर फिर से काम होना चाहिए.
यह भी पढ़ें: एअर इंडिया ने फुकेट-दिल्ली फ्लाइट के पायलट को नौकरी से निकाला, नशे में उड़ाया था प्लेन
बम धमाके में 329 लोगों की हुई थी मौत
23 जून 1985 को एअर इंडिया फ्लाइट 182 मॉन्ट्रियल से लंदन जा रही थी. विमान आयरलैंड के पास अटलांटिक महासागर में दुर्घटनाग्रस्त हुआ था. विमान में सवार सभी 329 लोगों की मौत हुई थी. इनमें बड़ी संख्या में कनाडाई नागरिक थे. कनाडा सरकार ने भी इस हमले को अपने इतिहास के सबसे घातक आतंकी हमलों में माना है.
चार दशक से ज्यादा समय बीतने के बाद अब जांच के भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं. पीड़ित परिवार जांच को बंद करने के बजाय इसे और मजबूत करने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि जब तक मामले से जुड़े सभी सवालों के जवाब नहीं मिलते, जांच जारी रहनी चाहिए.
 
Copyright © 2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today
होम
वीडियो
लाइव टीवी
न्यूज़ रील
मेन्यू
मेन्यू

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News