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अमरावती: चिखलदरा को विदर्भ में स्वर्ग की सुंदरता से भरी जगह के रूप में जाना जाता है। यहां के आदिवासी किसान अब स्ट्रॉबेरी की खेती करने लगे हैं। महाबलेश्वर से स्ट्रॉबेरी के पौधे लाए गए और खेतों में लगाए गए।
चिखलदरा की ओर मोथा गांव में कई किसान स्ट्रॉबेरी की खेती करते हैं। इनमें नारायण खड़के ने बड़े गांव के पास आधा एकड़ जमीन पर अक्टूबर माह में स्ट्रॉबेरी लगाई थी। इस आधे एकड़ में लगभग 6 हजार स्ट्रॉबेरी के पौधे लगे थे। स्ट्रॉबेरी की खेती में उन्हें एक लाख रुपये की लागत आई।
जैविक तरीके से उगाई गई स्ट्रॉबेरी से उन्होंने अब तक दो लाख का मुनाफा कमाया है। चिखलदार आने वाले पर्यटक सड़क किनारे स्ट्रॉबेरी के ठेलों पर जाते हैं और जैविक स्ट्रॉबेरी खरीदते हैं। इन स्ट्रॉबेरी ने आदिवासी किसानों को रोजगार दिया है।
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