न्यूयॉर्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टीम ने एक बार फिर दावा किया है कि उनकी टैरिफ नीति ने भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने में अहम भूमिका निभाई. न्यूयॉर्क की एक अदालत में बुधवार को सुनवाई के दौरान ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने कहा कि ट्रंप ने व्यापारिक टैरिफ का इस्तेमाल कूटनीतिक दबाव के तौर पर किया, जिससे भारत-पाकिस्तान में तनाव कम हुआ. ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ से रोक हटवाने के लिए यहां तक तर्क दिया कि अगर रोक नहीं हटी तो सीजफायर टूट सकता है. साथ ही वैश्विक सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी. फिलहाल के लिए ट्रंप प्रशासन को रहत मिल गई है और उसी दिन अमेरिकी अपील कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ पर लगी रोक को हटा दिया. हालांकि भारत ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है.
अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने अदालत में कहा कि ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान को व्यापार बढ़ाने का ऑफर देकर दोनों देशों को सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए राजी किया. लुटनिक ने चेतावनी दी कि अगर टैरिफ पर रोक लगी तो यह सीजफायर खतरे में पड़ सकता है, जिससे दक्षिण एशिया की सुरक्षा को नुकसान पहुंचेगा. उन्होंने यह भी कहा कि टैरिफ की वजह से ही चीन जैसे देशों के साथ व्यापारिक बातचीत आगे बढ़ी.
भारत ने ट्रंप के दावों को फिर से खारिज किया. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को दिल्ली में कहा, ‘7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने से लेकर 10 मई को सीजफायर तक भारत और अमेरिका के नेताओं के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन इसमें व्यापार या टैरिफ का कोई जिक्र नहीं था.’ उन्होंने साफ किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर का फैसला दोनों देशों के DGMO की सीधी बातचीत से हुआ. जायसवाल ने यह भी दोहराया कि भारत-पाकिस्तान के बीच कोई भी बातचीत सिर्फ द्विपक्षीय होगी.
बुधवार को न्यूयॉर्क की इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट ने ट्रंप के ‘लिबरेशन डे’ टैरिफ को गलत ठहराते हुए इस पर रोक लगा दी थी. कोर्ट ने कहा कि ट्रंप ने 1977 के इमरजेंसी पावर एक्ट का गलत इस्तेमाल किया. लेकिन, 24 घंटे बीतने से पहले गुरुवार को वॉशिंगटन की फेडरल सर्किट अपील कोर्ट ने ट्रंप की अपील मान ली और टैरिफ को फिलहाल लागू रखने की इजाजत दे दी. ट्रंप की टीम ने दलील दी कि टैरिफ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी हैं.
ट्रंप के टैरिफ की नीति को अमेरिका में छोटे कारोबारियों ने अदालत में चुनौती दी थी. उनका कहना है कि ट्रंप ने इमरजेंसी पावर का गलत इस्तेमाल करके कई देशों पर टैरिफ थोपा, जिससे बाजार अस्थिर हुआ.