Gorakhpur News: गोरखपुर, निज संवाददाता। सावन के दूसरे सोमवार पर शहर से गांव तक शिव भक्ति से सराबोर नजर आया। प्रमुख मार्ग पर कांवड़िए बोल बम का स्वर सजाए भोलेनाथ का आह्वान करते अपनी धुन में चलते दिखे। वहीं, प्रमुख शिवालयों पर भक्तों का मेला उमड़ता नजर आया। श्रद्धालुओं द्वारा शहर के महादेव झारखंडी मंदिर, बाबा मुक्तेश्वर नाथ मंदिर, गोरखनाथ मंदिर व मानसरोवर मंदिर आदि शिवालयों में भगवान शिव की विशेष आराधना कर जलाभिषेक किया गया। शहर के शिवालयों पर श्रद्धालुओं की आस्था उमड़ी। सुबह से ही श्रद्धालु लंबी-लंबी कतारों में खड़े नजर आए। बड़े और प्राचीन शिव मंदिरों पर मेले जैसा यह शानदार दृश्य पूरे दिन बना रहा। वहीं, बालाजी मंदिर में प्रातः 4:00 बजे से भक्तों द्वारा पूजन का कार्यक्रम शुरू हो गया। इस अवसर पर बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट के अध्यक्ष जितेंद्र मणि तिवारी एवं उपाध्यक्ष अमितेश्वर कुमार दुबे बबलू, पं. शुभम शास्त्री, अवनीश पांडे, कामाख्या नारायण सिंह, डॉ सीताराम पांडे, राणा सिंह आदि ने भक्तों की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा。
दूसरी ओर सावन माह में भगवान शिव को जलाभिषेक के लिए बड़हलगंज के सरयू तट से जल भरने के लिए दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालुओं के जत्थे हर-हर महादेव की धुन में लीन दिखाई पड़ें। वहीं, ताला डीह पर नीलकंठ महादेव मंदिर में विधिविधान से पूजन-अर्चन किया गया। मोटेश्वर नाथ मंदिर पिपराइच में भी कुछ ऐसा ही माहौल देखने को मिला।
सूर्यकुंड धाम में सूर्यकुंड धाम विकास समिति के तत्वावधान में आयोजित 30 दिवसीय श्रावण महोत्सव के 12वें दिन दूसरे सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में शिव महाआरती संपन्न हुई। वहीं, कई पालियों में 173 लोगों ने रुद्राभिषेक किया। शाम को शृंगार कर महाकाल की भस्म आरती की गई। कथावाचक पंडित अवनीश शुक्ला ने शिव महिमा का बखान कर श्रद्धालुओं को भाव विह्वल कर दिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रेलवे कोऑपरेटिव बैंक के पूर्व सचिव प्रहलाद सिंह उपस्थित रहे। इसके पूर्व सूर्यकुंड धाम विकास समिति के संयोजक संतोष मणि त्रिपाठी के नेतृत्व में भोलेनाथ का षोडशोपचार पूजन किया। लोक गायक अशोक पांडेय लहरी ने शिव भजन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन अर्चना शर्मा एवं आभार सपना लखमानी ने किया। इस अवसर पर मदन राजभर, पं सीताराम मिश्र, नीतू, सच्चिदानंद, वीना, गायत्री आदि मौजूद रहे।
गोरखपुर। वाराणसी से प्रकाशित पंचांग के अनुसार, 11 अगस्त दिन मंगलवार को प्रातः काल 3 बजकर 43 मिनट के पश्चात श्रावण कृष्ण चतुर्दशी प्रारंभ हो रही है, जो 12 अगस्त को भोर 1:17 बजे तक रहेगा। इस तरह प्रदोषकाल और मध्य रात्रि में चतुर्वेदी होने से यही तिथि सावन शिवरात्रि के नाम से जानी जाएगी। पं. शरद चंद मिश्र के अनुसार, इस दिन रात्रि में चारों प्रहर पूजा का विधान है। उन्होंने बताया कि सावन शिवरात्रि को शिव जी की अर्चना से महाशिवरात्रि के समान फल राय माना गया है। इस दिन शिव साधना, जलाभिषेक करने से पूरे वर्ष के शिव साधना का फल मिलता है। मान्यता है कि गंगाजल या पवित्र नदियों के जल से अभिषेक करने से भगवान भोलेनाथ प्रसन्न होकर सभी मनोकामनाएं पूरा करते हैं। मार्कंडेय ऋषि ने इसे सावन शिवरात्रि में तपस्या करके शिव जी को प्रसन्न किए थे।
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