हरिद्वार के बहादराबाद कस्बे में धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का प्रतीक बने 127वें रामलीला महोत्सव का शुभारंभ शुक्रवार को ध्वजारोहण कार्यक्रम के साथ हुआ। बहादराबाद रामलीला कमेटी के तत्वावधान में आयोजित इस ऐतिहासिक अवसर पर अध्यक्ष अनिल चौहान ने विधिवत पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच ध्वज फहराया।
हरिद्वार: उत्तराखंड के हरिद्वार के बहादराबाद कस्बे में धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का प्रतीक बने 127वें रामलीला महोत्सव का शुभारंभ शुक्रवार को ध्वजारोहण कार्यक्रम के साथ हुआ। बहादराबाद रामलीला कमेटी के तत्वावधान में आयोजित इस ऐतिहासिक अवसर पर अध्यक्ष अनिल चौहान ने विधिवत पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच ध्वज फहराया। ध्वजारोहण के साथ ही पूरे क्षेत्र में भक्ति और उल्लास का वातावरण बन गया।
श्रद्धालुओं और युवाओं ने बड़ी संख्या में भागीदारी
कार्यक्रम में कमेटी के पदाधिकारियों, गणमान्य नागरिकों, स्थानीय श्रद्धालुओं और युवाओं ने बड़ी संख्या में भागीदारी की। सभी ने सामूहिक रूप से ध्वज वंदना कर प्रभु श्रीराम से क्षेत्र की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। उपस्थित श्रद्धालुओं ने जयकारों और भजन-कीर्तन के साथ वातावरण को राममय कर दिया।
बहादराबाद की रामलीला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं..
इस अवसर पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष अनिल चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि बहादराबाद की रामलीला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि बीते 126 वर्षों से यह रामलीला लोगों की आस्था और समाज को जोड़ने का माध्यम रही है। चौहान ने भरोसा दिलाया कि इस वर्ष भी रामलीला मंचन भव्यता और अनुशासन के साथ कराया जाएगा, ताकि समाज मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात कर सके।
उन्होंने कहा कि रामलीला केवल राम-कथा के मंचन तक सीमित नहीं, बल्कि यह नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने का माध्यम भी है। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे सक्रिय रूप से महोत्सव में भाग लें और अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए परंपरा को आगे बढ़ाएं।
बड़ी संख्या में महिलाएं भी मौजूद
कार्यक्रम में कमेटी के सदस्य, स्थानीय व्यापारी, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में महिलाएं भी मौजूद रहीं। सभी ने संकल्प लिया कि इस वर्ष का रामलीला महोत्सव और भी सफल और भव्य बनाया जाएगा। ध्वजारोहण के बाद सामूहिक प्रसाद वितरण किया गया और श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को बधाई दी। पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल रहा। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था की विशेष तैयारी भी की गई थी। बहादराबाद की यह रामलीला उत्तर भारत की सबसे पुरानी और परंपरागत रामलीलाओं में गिनी जाती है। 127वें वर्ष में प्रवेश करने के साथ ही यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी ऐतिहासिक महत्व रखता है।