Lucknow News: -शासन ने एक अक्तूबर से मेडिकल बिलों की ऑनलाइन आवेदन की अनिवार्यता लागू की
-तेजी से उठ रही ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन व्यवस्था लागू रखने की मांग
लखनऊ, विशेष संवाददाता।
प्रदेश में चिकित्सा दावों के ऑनलाइन आवेदन की अनिवार्यता ने दिक्कत बढ़ा दी है। लाखों पेंशनरों सहित तमाम सरकारी कर्मचारी भी परेशान हैं। बड़ी संख्या में बुजुर्ग पेंशनरों के पास न तो संसाधन हैं और न ही वे ऑनलाइन आवेदन करना ही जानते हैं। यह समस्या काफी संख्या में उम्रदराज सरकारी कर्मचारियों के साथ भी हैं। हालांकि कर्मचारियों के लिए सचिवालय में हेल्प डेस्क भी बनाई गई है। उधर, पेंशनरों ने मेडिकल क्लेम के आवेदन के लिए ऑनलाइन के साथ ही ऑफलाइन विकल्प भी दिए जाने की मांग को लेकर प्रदेशभर में प्रदर्शन किया।
प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की संख्या तकरीबन 14 लाख और पेंशनर लगभग 12 लाख हैं। इन सभी के चिकित्सा दावों (मेडिकल क्लेम) के आवेदन, जांच और निस्तारण की व्यवस्था ऑफलाइन ही थी। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने बीते माह शासनादेश जारी करके एक अक्तूबर से सिर्फ ऑनलाइन आवेदन ही स्वीकार किए जाने के आदेश दिए थे। इस आदेश के बाद तमाम कर्मचारियों खासतौर से पेंशनरों की समस्या बढ़ गई। उन्होंने बीते दिनों अपर मुख्य सचिव वित्त के साथ बैठक में भी इस मुद्दे को उठाया था। हालांकि अभी तक इस मामले में कोई आदेश जारी नहीं हुआ है।
पेंशनरों ने धरना-प्रदर्शन कर जताई नाराज़गी
इधर, सेवानिवृत कर्मचारी एवं पेंशनर एसोसिएशन के आह्वान पर चिकित्सा बिल को विधायकों की भांति ऑफलाइन जमा करने की मांग को लेकर राजधानी लखनऊ सहित हर जिले में धरना-प्रदर्शन किया। डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया गया। लखनऊ में कर्मचारी नेता बीएन सिंह प्रतिमा पर प्रदर्शन किया गया। अखिल भारतीय राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष सुभाष लम्बा पेंशनरों की मांग का समर्थन किया। उन्होंने केंद्र सरकार पर कर्मचारी-पेंशनर, शिक्षक विरोधी होने का आरोप लगाया। उन्होंने विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेश के कर्मचारियों शिक्षकों, पेंशनरों का आह्वान किया कि 12 दिसंबर को रामलीला मैदान दिल्ली होने वाली रैली में भागीदारी करें। संगठन के अध्यक्ष अमर नाथ यादव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष बीएल कुशवाहा, महामंत्री ओपी त्रिपाठी ने कहा कि मेडिकल बिलों के ऑनलाइन आवेदन की अनिवार्यता के आदेश को लेकर प्रदेशभर के पेंशनरों में भारी आक्रोश है। चिकित्सा बिल जमा नहीं हो पर रहा है। 70, 80, 90 साल के बुजुर्ग दवा के अभाव में परेशान हो रहे हैं। पैसे के अभाव में इलाज नहीं हो पा रहा।
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