Yuvraj Singh
Date: 07-10-26 17:45
Neem Karoli Baba: ‘हनुमान अंश’ की सफलता के बाद नीब करौरी बाबा को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है. इसका असर उत्तराखंड के कैंची धाम में भी साफ नजर आ रहा है, जहां वीकेंड और छुट्टियों के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. कैंची धाम जाने वाले रास्तों पर लंबा जाम लगने और कई बार घंटों तक वाहनों के फंसे रहने की खबरें सामने आ रही हैं. भीमताल, भवाली और गरम पानी के आसपास भी ट्रैफिक का दबाव बढ़ा है. आश्रम में सामान्य दिनों की तुलना में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की बात कही जा रही है, जबकि वीकेंड पर यह आंकड़ा काफी अधिक पहुंच जाता है.
कैंची धाम में बढ़ी भीड़
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या का असर हल्द्वानी से कैंची धाम और आगे नैनीताल-अल्मोड़ा जाने वाले मार्गों पर भी दिखाई दे रहा है. जिस सफर में सामान्य तौर पर कुछ घंटे लगते हैं, वह भारी ट्रैफिक के कारण कई बार काफी लंबा हो जाता है. हालात को देखते हुए कुछ वाहनों को कैंची की ओर जाने से रोका गया और पहाड़ की तरफ जाने वाले ट्रैफिक को वैकल्पिक मार्गों से भेजा गया. भीमताल और भवाली के पार्किंग क्षेत्रों से शटल सेवा भी बढ़ाई गई, ताकि श्रद्धालुओं को आगे जाने में सुविधा मिल सके.
देशभर में हैं महाराजजी से जुड़े स्थल
नीब करौरी बाबा की आध्यात्मिक पहचान कैंची धाम तक सीमित नहीं है. उनके जीवन और साधना से जुड़े कई अन्य स्थान भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखते हैं. इनमें उत्तराखंड के काकड़ीघाट से लेकर वृंदावन और दिल्ली तक के आश्रम शामिल हैं. इन जगहों पर बाबा की स्मृतियों, मंदिरों और उनकी साधना से जुड़ी परंपराओं को आज भी देखा जा सकता है.
वृंदावन आश्रम में है महाराजजी का महासमाधि मंदिर
वृंदावन का आश्रम नीब करौरी बाबा से जुड़े प्रमुख स्थलों में गिना जाता है. बताया जाता है कि यह आश्रम 1967 में परिक्रमा मार्ग पर मथुरा रोड के पास स्थापित किया गया था और 1973 में महाराजजी ने यहीं अपना शरीर छोड़ा था. आश्रम परिसर में हनुमान, दुर्गा, सीता-राम और शिवजी को समर्पित मंदिरों के साथ महाराजजी का महासमाधि मंदिर भी है. हर साल सितंबर में यहां महासमाधि भंडारे का आयोजन किया जाता है.
वृंदावन में अलग-अलग धर्मों की स्थापत्य शैली का मेल
महाराजजी से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार 1973 में चैत्र नवरात्र के दौरान उन्होंने यहां नौ दिनों तक यज्ञ कराया था. बाद में उनकी स्मृति में उस स्थान पर एक विशेष मंदिर का निर्माण कराया गया, जिसे उनके अंतिम संस्कार के स्थान से जोड़ा जाता है. इस मंदिर की वास्तुकला की खास बात यह बताई जाती है कि इसमें मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा और पगोडा जैसी विभिन्न धार्मिक स्थापत्य शैलियों का प्रभाव दिखाई देता है.
दिल्ली में भी है नीब करौरी बाबा का आश्रम
दिल्ली का आश्रम भी महाराजजी से जुड़े प्रमुख स्थानों में शामिल है. बताया जाता है कि उन्होंने 1973 की गर्मियों में मेहरौली के पास मंडी रोड से जोनापुर की ओर स्थित इस आश्रम की शुरुआत की थी. यहां सुबह और शाम आरती होती है. हरे-भरे और शांत वातावरण वाले इस परिसर में ठहरने के लिए श्रद्धालुओं को पहले से अनुमति और पहचान पत्र की आवश्यकता होती है.
काकड़ीघाट में नदी किनारे साधना से जुड़ी है परंपरा
उत्तराखंड के अल्मोड़ा और रानीखेत के बीच कोसी नदी के किनारे स्थित काकड़ीघाट भी नीब करौरी बाबा से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है. इस जगह का संबंध कई संतों से रहा है और स्वामी विवेकानंद के यहां आने तथा ध्यान करने का भी उल्लेख मिलता है. कहा जाता है कि नीब करौरी बाबा ने भी यहां लंबे समय तक ध्यान और आध्यात्मिक साधना की. नदी किनारे का शांत वातावरण काकड़ीघाट को कैंची धाम की भीड़ से अलग एक आध्यात्मिक अनुभव देता है.
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