OPEC से हटते ही UAE का बड़ा खेल, सऊदी अरब को पछाड़ बना भारत का दूसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर; आंकड़े करेंगे हैरान – Jagran

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संयुक्त अरब अमीरात मई में भारत का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है, जिसने सऊदी अरब को पीछे छोड़ दिया। …और पढ़ें
यूएई बना भारत का दूसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर
यूएई बना भारत का दूसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर।
सऊदी को पछाड़ भारत का दूसरा बड़ा आपूर्तिकर्ता।
ओपेक से बाहर निकलने के बाद यूएई की बढ़ी आपूर्ति।
नई दिल्ली। भारत को तेल सप्लाई करने वाले देशों में शामिल संयुक्त अरब अमीरात ने बड़ा खेल कर दिया। यह खेल सऊदी अरब के साथ हुआ है। दरअसल, अभी तक भारत का दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर रहा सऊदी अरब अब नंबर दो पर नहीं रहा। फिलहाल, मई के आंकड़े तो यही गवाही दे रहे हैं।
मई के महीने में रूस के बाद संयुक्त अरब अमीरात भारत का दूसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का सप्लायर रहा। इसकी एक बड़ी वजह यह भी रही कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता ईरान- अमेरिका युद्ध के बाद से ही बाधित है।
कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार मई के महीने में भारत ने संयुक्त अरब अमीरात से प्रतिदिन 540000 बैरल कच्चे तेल का आयात किया, जो अप्रैल से 5 % कम है, लेकिन मार्च के 203,000 बीपीडी (Barrel Per Day) के स्तर से 166% अधिक है।
कच्चे तेल के आयात के साथ रूस सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बना रहा, जो अप्रैल से 23 प्रतिशत बढ़कर 1.9 मिलियन बीपीडी हो गया। अमेरिकी प्रतिबंधों से छूट के कारण रूस से कच्चे तेल का आयात जनवरी के 1.08 बीपीडी से 73 प्रतिशत बढ़ गया।
सऊदी अरब 398,000 बीपीडी के साथ तीसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता था, लेकिन होर्मुज की लगातार नाकाबंदी के कारण अप्रैल के आयात में 41% की गिरावट आई। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से तेल फुजैरा और सऊदी अरब के यानबू पाइपलाइनों के माध्यम से भेजा जाता था, जो होर्मुज को बायपास करते हैं और वैश्विक ऊर्जा आयात के लिए महत्वपूर्ण मार्गों के रूप में उभरे हैं।
Kpler के अनुसार, मई में भारत का कच्चा तेल आयात पिछले महीने के मुकाबले 11 प्रतिशत बढ़कर 5 मिलियन bpd हो गया, और पिछले साल के मुकाबले इसमें 4.17 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि दुनिया के तीसरे सबसे बड़े उपभोक्ता देश भारत ने रूस और वेनेज़ुएला से तेल की खरीद बढ़ा दी।
अप्रैल के आखिरी में संयुक्त अरब अमीरात ने घोषणा की थी कि वह 1 मई से ओपेक और ओपेक+ देशों का सदस्य नहीं रहेगा। दरअसल, यह एक ऐसा संगठन है जो तेल के निर्यात और कीमतों को स्थिर करने का काम करता है। इसके तहत तेल उत्पादन करने वाले देशों पर लिमिट भी होती है कि वह कितना तेल उत्पादित कर सकते हैं। OPEC से निकलने के बाद अब यूएई कितना भी तेल निकाल सकता है। यानी वह अपनी उत्पादन क्षमता को बढ़ा सकता है।
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