Siwan News स्वतंत्रता संग्राम में रामचन्द्र राय को मिली थी कठोर कारावास की सजा – Hindustan

Siwan News प्रवीण कुमार तिवारी गुठनी, एक संवाददाता। स्वतंत्रता संग्राम में प्रखंड का अपना अलग ही स्थान था। इसका सबसे बड़ा कारण था आजादी की धधकती आग से युवाओं का अगाध प्रेम का होना। हालांकि इस आग से प्रखंड भी अछूता नहीं रह गया था। स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में प्रखंड से करीब 1 दर्जन से अधिक लोग गिरफ्तार करके जेल भेज दिए गए थे। इसके बावजूद स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना कदम कभी भी पीछे नहीं खींचा। और आजादी में अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया। इस स्वतंत्रता संग्राम में प्रखंड के ग्यासपुर गांव निवासी रामचंद्र राय भी एक थे। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अग्रिम भूमिका निभाई थी। उनके पौत्र अजय कुमार सिंह ने बताया कि स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी चीजों को वह परिवार में खुलकर बताते थे। और इसके लिए वे हम लोगों को प्रेरित भी करते थे। बताया कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान थाना फूंकने और युवाओं का दल के नेतृत्व के आरोप में उन्हें 2 वर्ष की कठोर कारावास हुई थी। इस दौरान उन्हें पटना के कैंप जेल में 1942 से 1944 तक बंद कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि दरोगा जानसन रॉड को मारने और जानलेवा हमले के मामले में भी उन्हें कारावास हुई थी। परिजनों ने बताया कि इस दौरान उन्हें अंग्रेजों द्वारा जेल में दंड के तौर पर सुबह और शाम 50 हंटर मारने की सजा मिली थी।

भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान अंग्रेजो के खिलाफ नारेबाजी करने, थाना फूंकने, थानेदार पर हमला करने, युवाओं का दल बनान के मामले में रामचंद्र राय को जेल जाना पड़ा था। इस दौरान मजिस्ट्रेट बीएन मुखर्जी द्वारा उनसे माफी मांगने के लिए कहा गया। जिसको रामचंद्र राय ने इंकार कर दिया। नाराज मजिस्ट्रेट ने उन्हें 2 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई। उनके पौत्र अजय कुमार सिंह का कहना था कि उनके साथ कई लोग मजिस्ट्रेट से माफी मांग कर दोषमुक्त व रिहा हो गए थे। लेकिन इन्होंने देश के सम्मान के लिए झुकना पसंद नहीं किया।

रामचंद्र राय स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले रामचंद्र राय को शिक्षक की नौकरी मिल गई थी। लेकिन उन्हें शिक्षक शिक्षक नहीं बल्कि देश भक्त बनने का जुनून था। उन्होंने 12वीं क्लास की शिक्षा लेने के बाद देशभक्ति और स्वतंत्रता आंदोलन में जाना पसंद किया। वे जेल में रहने के दौरान बागवानी, कृषि, पौधरोपण का काम करते थे। इस दौरान उन्हें गीता, रामायण, उपनिषद, भागवत, पुराण पढ़कर यातनाएं काटी। उनके परिवार में उनके पौत्र अजय कुमार सिंह, कपिध्वज प्रताप सिंह, शशि सिंह, और सूची सिंह शामिल हैं।

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