बांका, नगर प्रतिनिधि। जिले में टीबी मुक्त भारत अभियान लगातार गति पकड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता, घर-घर चल रही स्क्रीनिंग और समाज के बढ़ते सहयोग से टीबी उन्मूलन की दिशा में बांका उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है।अभियान के तहत अब तक 3 लाख 53 हजार 316 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। वहीं जांच के दौरान 1360 सक्रिय टीबी मरीजों की पहचान हुई है, जिन्हें तत्काल राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत उपचार से जोड़ते हुए नियमित रूप से निःशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। जबकि स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले के सभी सरकारी अस्पतालों एवं स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी की आधुनिक जांच और निःशुल्क इलाज की व्यवस्था उपलब्ध है। जिससे समय पर जांच और नियमित उपचार के कारण मरीज तेजी से स्वस्थ भी हो रहे हैं।
विभाग का लक्ष्य केवल मरीजों का इलाज करना ही नहीं, बल्कि समुदाय की भागीदारी से जिले को टीबी मुक्त बनाना भी है। साथ ही अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में निक्षय मित्र योजना की बढ़ती भागीदारी शामिल है। दरअसल, जिले में अब तक 308 निक्षय मित्र आगे आकर टीबी मरीजों को सहयोग प्रदान कर रहे हैं। जिनके माध्यम से कुल 357 फूड बास्केट का वितरण टीबी मरीजों के बीच किया जा चुका है।इन पोषण किटों में आवश्यक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जाती है, जिससे उपचाराधीन मरीजों को पौष्टिक आहार मिलता है और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने के साथ-साथ मानसिक संबल भी मिलता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि, नियमित दवा के साथ संतुलित पोषण टीबी से शीघ्र स्वस्थ होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इधर टीबी की समय रहते पहचान सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांवों और शहरी क्षेत्रों में विशेष स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है। आशा कार्यकर्ता, एएनएम और अन्य स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर संभावित मरीजों की पहचान कर रहे हैं। जिन लोगों में दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी, लगातार बुखार, तेजी से वजन घटना, रात में अत्यधिक पसीना आना या खांसी के साथ खून आना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, उनकी तत्काल जांच कराई जा रही है ताकि संक्रमण को शुरुआती अवस्था में ही नियंत्रित किया जा सके।
कहते हैं सीएम टीबी अब पूरी तरह से इलाज योग्य बीमारी है। यदि मरीज चिकित्सक के निर्देशानुसार नियमित रूप से दवा ले और उपचार बीच में न छोड़े, तो वह पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है। उन्होंने आगे कहा कि, जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक जांच सुविधाएं और निःशुल्क दवाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि, टीबी के लक्षण दिखाई देने पर बीमारी को छिपाने के बजाय तुरंत नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं। समय पर पहचान, नियमित उपचार, पौष्टिक भोजन और परिवार व समाज के सहयोग से टीबी को पूरी तरह हराया जा सकता है।
डॉ. जीतेन्द्र कुमार सिंह, सिविल सर्जन, बांका
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