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25 साल पहले थिएटर्स में धमाका करने वाली ‘कहो ना प्यार है’ में इंटरवल से ठीक पहले ऋतिक रोशन के किरदार, रोहित का मरना, ऑडियंस के लिए एक शॉक जैसा था. अगर सोचा जाए तो पहली ही फिल्म में हीरो को मार देना काफी रिस्क भरा मामला हो सकता था.
हालांकि, डायरेक्टर राकेश रोशन ने ऑडियंस के लिए फिल्म में एक तगड़ा सरप्राइज प्लान किया था और सेकंड हाफ में ऋतिक फिर से अपने ही हमशक्ल के रोल में नजर आए. ‘कहो ना प्यार है’ हिट हुई और ऋतिक सुपरस्टार बन गए. लेकिन ये सिर्फ ऋतिक की ही कहानी नहीं है, बल्कि बॉलीवुड को तो जैसे डेब्यू फिल्म में एक्टर्स को ऑनस्क्रीन मरते दिखाने में मजा आता है. और कमाल ये है कि डेब्यू फिल्म में मरने वाले एक्टर्स आगे बड़े चलकर बहुत पॉपुलर भी होते हैं…
आमिर खान और जूही चावला
बॉलीवुड के सुपरस्टार आमिर खान और अपने दौर की टॉप एक्ट्रेस रहीं जूही चावला ने, लीड रोल में एकसाथ डेब्यू किया था. दोनों की पहली फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ 1988 में रिलीज हुई थी. ये फिल्म एक विशुद्ध लव स्टोरी थी और कहानी के अंत में दोनों के किरदार मर जाते हैं. फिल्म में आमिर और जूही की ऑनस्क्रीन डेथ हुई लेकिन रियल लाइफ में दोनों जनता के फेवेरेट हो गए और आगे चलकर बड़े स्टार्स बने.
दीपिका पादुकोण
ऋतिक की ‘फाइटर’ को-स्टार दीपिका पादुकोण भी अपनी पहली ही फिल्म में ऑनस्क्रीन मरती नजर आई थीं. ‘ओम शांति ओम’ में दीपिका ने डबल रोल प्ले किया था. उनके पहले किरदार शांतिप्रिया की कहानी में मौत हो जाती है. बिल्कुल ‘कहो ना प्यार है’ वाले अंदाज में, फिल्म के अगले हिस्से में वो शांतिप्रिया की हमशक्ल सैंडी के रोल में नजर आती हैं.
जॉन अब्राहम
‘धूम’ से जनता के दिल पर छा जाने से पहले भी जॉन अब्राहम जनता में अपनी जगह बनाने लगे थे. इसकी शुरुआत उनकी पहली फिल्म ‘जिस्म’ (2003) से हो गई थी. इस कहानी के अंत में उनके किरदार की मौत हो जाती है. बिपाशा के साथ पैशनेट लव स्टोरी और गानों ने जॉन को पहली ही फिल्म से जनता में पॉपुलैरिटी दिला दी थी.
प्रियंका चोपड़ा
प्रियंका ने सनी देओल की फिल्म ‘द हीरो’ से डेब्यू किया था. टीवी पर बहुत पॉपुलर रही इस फिल्म में प्रियंका का किरदार आपको याद है? देश को बचाने के मिशन में सनी का साथ दे रहीं प्रियंका का किरदार फिल्म के अंत में मर जाता है. डेब्यू फिल्म में प्रियंका की ऑनस्क्रीन डेथ हुई, मगर इसके बाद उनके करियर की लाइफ बहुत लंबी हो गई और अब वो हॉलीवुड में भी नाम बना चुकी हैं.
स्पेशल मेंशन: अर्जुन कपूर और परिणीति चोपड़ा
‘इशकजादे’ (2012) में अर्जुन और परिणीति के किरदारों का आर्क लगभग वैसा ही था, जैसा ‘कयामत से कयामत’ तक में आमिर-जूही का. दोनों के परिवारों की कट्टर दुश्मनी इनकी लव स्टोरी के पूरा ना होने का कारण बनती है. हालांकि, ‘इशकजादे’ में दोनों लीड एक्टर्स के किरदारों में और भी कई लेयर्स थीं.
अर्जुन के साथ-साथ ये परिणीति की भी, बतौर लीड डेब्यू फिल्म थी. हालांकि, परिणीति के महत्वपूर्ण रोल वाली ‘लेडीज वर्सेज रिकी बहल’ पहले रिलीज हुई थी. दोनों ही एक्टर्स को ‘इशकजादे’ से ड्रीम डेब्यू मिला था. लेकिन बाद में इनकी फिल्म चॉइस बहुत अच्छी नहीं रही, जिसने दोनों के करियर को नुकसान पहुंचाया.
क्या है डेब्यू फिल्म में ऑनस्क्रीन डेथ की वजह?
बड़े पर्दे पर किरदार की मौत एक्टर को बहुत सिम्पथी दिलाती है. इस मामले में ‘शोले’ एक कमाल का उदाहरण है. धर्मेंद्र उस दौर में अमिताभ बच्चन से बड़े स्टार हुआ करते थे. लेकिन ‘शोले’ में अमिताभ की ऑनस्क्रीन डेथ देखकर जनता को उनसे बड़ा प्यार हो गया. जबकि, शुरुआत में जब फिल्म को ठंडा रिस्पॉन्स मिल रहा था तो फिल्म से जय (अमिताभ) की मौत वाला सीन हटाकर, उसे जिंदा दिखाए जाने की प्लानिंग होने लगी थी.
किरदार की मौत से जनता को एक्टर के लिए एक सिम्पथी वाला कनेक्शन महसूस होता है. डेब्यू फिल्म में एक्टर को जनता से कनेक्शन मिलना उसके करियर के लिए कमाल कर सकता है. ऊपर जितने एक्टर्स की बात की गई है, डेब्यू फिल्मों में वो रोमांटिक रोल में थे. ऐसे में दर्शकों से मिले प्यार और सिम्पथी का कॉम्बिनेशन एक ऐसा फॉर्मुला बन जाता है जो एक्टर को तुरंत पॉपुलैरिटी दिला सकता है. शायद इसीलिए नए एक्टर्स के साथ बॉलीवुड फिल्मों ने ये काम बहुत किया है. अब देखना है कि इस फॉर्मुले को अगली बार किस एक्टर पर आजमाया जाता है.
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