Shreeom Singh
Date: 14-10-26 12:13
पाकिस्तान में पानी की कमी अब खेती के लिए बड़ी मुसीबत बनती दिख रही है. देश में रबी की फसल की बुवाई से पहले ही सिंचाई के पानी में 22 प्रतिशत की कमी का अनुमान लगाया गया है. इसका असर पंजाब और सिंध जैसे कृषि प्रधान प्रांतों पर पड़ सकता है, जहां किसान गेहूं समेत सर्दियों की दूसरी फसलें उगाते हैं. इससे पाकिस्तान में खाद्य संकट की चिंता भी बढ़ सकती है.
पाकिस्तान सरकार इस समस्या को भारत के साथ सिंधु जल संधि से जोड़ रही है. लेकिन पानी की कमी के पीछे सिर्फ यही वजह नहीं है. नदियों में कम पानी आना, जलाशयों में पर्याप्त भंडारण नहीं होना और जरूरी परियोजनाओं का समय पर पूरा न होना भी इस संकट को बढ़ा रहे हैं.
पानी की कमी से किसानों की बढ़ेगी मुश्किल
पाकिस्तान के सिंधु नदी प्रणाली प्राधिकरण (IRSA) ने 2026-27 के रबी सीजन के लिए सिंचाई के पानी में 22 प्रतिशत की कमी का अनुमान जताया है. रबी के मौसम में गेहूं, जौ, चना और सरसों जैसी फसलें उगाई जाती हैं. ऐसे में पानी की कमी का सीधा असर किसानों की बुवाई और फसल की पैदावार पर पड़ सकता है.
‘डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, IRSA ने पानी की कमी के लिए नदियों में कम बहाव, जलाशयों में पानी का पर्याप्त भंडार नहीं होने और बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं में देरी को जिम्मेदार बताया है. पंजाब और सिंध में खेती बड़े पैमाने पर सिंचाई पर निर्भर है, इसलिए इन इलाकों में पानी की कमी का असर ज्यादा गंभीर हो सकता है.
सिंधु नदी के पानी पर निर्भर है पाकिस्तान की खेती
पाकिस्तान की कृषि व्यवस्था में सिंधु नदी प्रणाली की अहम भूमिका है. ‘एसोसिएटेड प्रेस ऑफ पाकिस्तान’ की रिपोर्ट के अनुसार, देश की 80 प्रतिशत से ज्यादा खेती सिंधु बेसिन से जुड़े सिंचाई नेटवर्क पर निर्भर करती है. यही वजह है कि नदियों में पानी कम होने से खेती और खाद्य सुरक्षा दोनों पर खतरा बढ़ जाता है.
पाकिस्तान में पानी की समस्या केवल नदियों में कम बहाव तक सीमित नहीं है. पानी को जमा करके रखने की क्षमता और जल प्रबंधन भी बड़ी चुनौतियां हैं. रिपोर्टों में जलविद्युत और दूसरी अहम परियोजनाओं के पूरा होने में देरी का भी जिक्र किया गया है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस संकट के लिए केवल भारत को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है?
सिंधु जल संधि पर भारत को घेर रहा पाकिस्तान
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने अप्रैल 2025 में सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला किया था. इसके बाद से पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता रहा है कि उसे पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है. हालांकि, संधि स्थगित होने और नदियों का पानी पूरी तरह रोक दिए जाने को एक ही बात नहीं माना जा सकता.
नदियों में पानी की मात्रा बारिश, बर्फबारी, ग्लेशियर पिघलने और तापमान जैसी प्राकृतिक परिस्थितियों से भी प्रभावित होती है. इसके अलावा पानी को जमा करने और सही समय पर इस्तेमाल करने की व्यवस्था भी अहम है. इसलिए पाकिस्तान में पानी की कमी को सिर्फ भारत के फैसले से जोड़कर देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता.
पिछले साल के मुकाबले भी कम आया पानी
‘एसोसिएटेड प्रेस ऑफ पाकिस्तान’ के अनुसार, अप्रैल से सितंबर 2026 के खरीफ सीजन में नदियों में पानी का वास्तविक बहाव अनुमान से 8 प्रतिशत कम रहा. पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले इसमें 22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. यह आंकड़ा पाकिस्तान में पानी की उपलब्धता को लेकर बढ़ती परेशानी की ओर इशारा करता है.
पानी को लंबे समय तक जमा रखने की सीमित क्षमता भी पाकिस्तान के लिए समस्या है. पर्याप्त भंडारण नहीं होने पर नदियों से आने वाले पानी का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाता और उसका कुछ हिस्सा अरब सागर में चला जाता है. ऐसे में बेहतर जल प्रबंधन और जरूरी परियोजनाओं को समय पर पूरा करना पाकिस्तान के लिए महत्वपूर्ण है.
रबी सीजन में पानी की कमी का असर कितना होगा, यह आगे की जल उपलब्धता और सिंचाई व्यवस्था पर निर्भर करेगा. फिलहाल पंजाब और सिंध के किसानों के सामने फसलों के लिए पर्याप्त पानी जुटाने की चुनौती है. ऐसे में संकट की वजहों की समीक्षा करना जरूरी है, न कि हर समस्या का दोष केवल भारत पर डाल देना.
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