आजमगढ़, संवाददाता। बारिश न होने और भीषण गर्मी की वजह से अब धान की नर्सरी भी प्रभावित होने लगी है। पौधे झुलसने के साथ ही पीले पड़ने लगे हैं। जिससे किसान परेशान हैं। जिले में 1.65 लाख हेक्टेयर में धान की फसल लगाने का लक्ष्य रखा गया है। करीब 11 हजार हेक्टेयर में धान की नर्सरी लगाई गई है।
जनपद का तापमान लगातार 40 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। रात में भी पारा 26 से 28 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह रहा है। जिसका असर अब फसलों पर भी पड़ने लगा है। सबसे अधिक धान की नर्सरी प्रभावित हो रही है। धान की नर्सरी डालने का उपयुक्त समय जून का पहला और दूसरा सप्ताह होता है। तापमान अधिक होने से किसानों ने नर्सरी देर डाली। गर्मी के प्रभाव से करीब 10 प्रतिशत अंकुरण कम हुआ है। आम तौर पर 15 जून से हल्की बरशि शुरू हो जाती थी। इस बार मानसून आने में देरी हो रही है। अभी तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। मौसम अनुकूल न होने से धान की नर्सरी प्रभावित हो रही है। धान की नर्सरी को बचाने के लिए किसान प्रतिदिन सिंचाई कर रहे हैं। इसके बाद भी मौसम की मार झेलनी पड़ रही है। पौधों की वृद्धि रुक गई है। संडा विधि से धान की खेती करने वाले किसान रोपाई कर दिए है। धूप और गर्मी से संडा धान भी प्रभावित हो रहा है।
धान पर मानसून की देरी का असर दिखने लगा है। संडा विधि से धान की खेती करने वाले किसान जून के दूसरे-तीसरे सप्ताह में संडा लगा देते हैं। मौसम साथ देता है तो परेशानी नहीं होती है। इस साल मौसम साथ नहीं दे रहा है। इसके साथ ही बिजली कटौती से भी किसानों को जूझना पड़ रहा है। नहरों में भी पानी नहीं है। जिससे डीजल से सिंचाई करना काफी महंगा पड़ रहा है।
धान की नर्सरी पर मौसम का प्रभाव पड़ा है। किसान लगातार सिंचाई करते रहें। खरपतवार का प्रबंधन करें। इससे नर्सरी प्रभावित नहीं होगी।
-सदानंद चौधरी, जिला कृषि अधिकारी
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