भारतीय अंग्रेजी साहित्य की पहचान उसके मिथकों और संस्कृति से – Hindustan

मुजफ्फरपुर, वसं। ललित नारायण तिरहुत महाविद्यालय के अंग्रेजी विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के अंतिम दिन शनिवार को भारतीय अंग्रेजी साहित्य में मिथक, समाज और संस्कृति पर चर्चा हुई। मुख्य वक्ता जॉर्जिया स्टेट यूनिवर्सिटी (अटलांटा, अमेरिका) के अकादमिक सलाहकार एवं सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेजेज, हैदराबाद के पूर्व कुलपति प्रो. डॉ. वी. गणेशन ने कहा कि भारतीय अंग्रेजी साहित्य की वैश्विक पहचान उसके मिथकों, दर्शन, सबाल्टर्न विमर्श और सांस्कृतिक विरासत से बनी है। उन्होंने कहा कि बिहार भारत का सांस्कृतिक गलियारा है। मिथिला माता सीता की भूमि, वैशाली लोकतंत्र की जन्मस्थली और नालंदा शिक्षा एवं ज्ञान का शाश्वत केंद्र है। मिथक किसी भी सभ्यता की सांस्कृतिक स्मृति होते हैं और भारतीय अंग्रेजी साहित्य विविध भाषाओं, संस्कृतियों और पहचानों को एक सूत्र में जोड़ता है।
सत्र की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. ममता रानी ने की। बीआरएबीयू के अंग्रेजी विभाग के प्रो. मधुर कुमार ने भारतीय अंग्रेजी साहित्य में मिथकों की जीवंतता और उनकी यथार्थवादी प्रस्तुति पर प्रकाश डाला। संचालन डॉ. उपेंद्र गामी और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. धर्मराज ने किया। समापन सत्र की मुख्य अतिथि बीआरएबीयू की सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. तारण राय ने आयोजन की सराहना की। सेवानिवृत्त प्रो. देवव्रत अकेला ने कहा कि हिंदी और अंग्रेजी साहित्य दोनों में मिथकों के माध्यम से सामाजिक जड़ताओं को तोड़ने का प्रयास किया गया है।
समापन अवसर पर प्रतिभागियों को शोधपत्र प्रस्तुत करने के लिए प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। प्राचार्य ने सेमिनार की सफलता के लिए अंग्रेजी विभाग और सहयोगी संस्थानों का आभार जताया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विनम्रता तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. जितेंद्र मिश्रा ने किया।
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