मुंबई, एजेंसी। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को आम ग्राहकों को वित्तीय उत्पादों और सेवाओं की गलत या भ्रामक बिक्री से बचाने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए नियमों के तहत बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को ऐसी प्रोत्साहन व्यवस्था बनाने से रोका जाएगा, जो कर्मचारियों को आक्रामक बिक्री के लिए प्रेरित करती हो। केंद्रीय बैंक के संशोधित नियम एक जनवरी 2027 से लागू होंगे। इन दिशानिर्देशों में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, ऋण सेवा प्रदाता और अन्य डिजिटल मार्केटिंग एजेंसियों को भी शामिल किया गया है, जिन्हें बैंक या वित्तीय संस्थान अपने उत्पादों के प्रचार और ग्राहक जोड़ने के लिए नियुक्त करते हैं।
आरबीआई ने कहा कि वित्तीय उत्पादों और सेवाओं में बढ़ती गलत बिक्री की शिकायतों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। नए नियमों के अनुसार, किसी भी बैंक या वित्तीय संस्था के कर्मचारियों को तीसरे पक्ष की ओर से सीधे इंसेंटिव नहीं दिया जा सकेगा।आरबीआई ने स्पष्ट किया कि बैंक और अन्य विनियमित संस्थाएं अपने कर्मचारियों को प्रोत्साहन राशि दे सकती हैं, लेकिन उनकी प्रोत्साहन नीति ऐसी नहीं होनी चाहिए, जिससे आक्रामक बिक्री या ग्राहकों को गलत जानकारी देकर उत्पाद बेचने को बढ़ावा मिले। केंद्रीय बैंक ने फरवरी 2026 में इस संबंध में मसौदा दिशा-निर्देश जारी किए थे। विभिन्न पक्षों से प्राप्त सुझावों और प्रतिक्रियाओं की समीक्षा के बाद अब अंतिम नियम जारी किए गए हैं। आरबीआई ने ने कहा कि वित्तीय उत्पादों के विज्ञापन, मार्केटिंग और बिक्री की पूरी जिम्मेदारी संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था की होगी, चाहे यह काम सीधे किया जाए या एजेंटों और डिजिटल माध्यमों के जरिए, उन पर भी ये नियम लागू होंगे।
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