नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। विकसित भारत 2047 का लक्ष्य हासिल करने के लिए पारदर्शी, जवाबदेह, तकनीक आधारित और सदस्य-केंद्रित सहकारी संस्थाओं का निर्माण जरूरी है। सोमवार को सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने कोऑपरेटिव मैनेजमेंट: द इंडियन पर्सपेक्टिव्स (नर्चरिंग कोऑपरेशन थ्रू कोऑपरेटिव्स) पुस्तक का विमोचन करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में सहकारी शिक्षा, नेतृत्व विकास और प्रबंधन क्षमता को मजबूत करना होगा, जिससे भारतीय सहकारी संस्थाएं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सके। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक सहकार से समृद्धि और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सहकारी शिक्षा, प्रबंधन और क्षमता निर्माण को मजबूत पर ध्यान केंद्रित करती है। कार्यक्रम में नाबार्ड के चेयरमैन डॉ. शाजी केवी ने कहा कि प्राथमिक कृषि ऋण समितियां और बहुउद्देश्यीय पैक्स ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव हैं।
उन्होंने कहा कि इन्हें सदस्य-केंद्रित और बहुउद्देश्यीय संस्थानों के रूप में विकसित करना जरूरी है जिससे कि गांवों में आर्थिक बदलाव को गति मिल सके। भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल और नाबार्ड के निदेशक सतीश मराठे ने कहा कि सहकारी बैंक देश में वित्तीय समावेशन को बढ़ाने, लोगों तक सस्ती वित्तीय सेवाएं पहुंचाने और आर्थिक मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। आज पेशेवर तरीके से संचालित और बेहतर प्रबंधन वाले सहकारी वित्तीय संस्थान समावेशी विकास के लिए बेहद जरूरी हैं। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के पूर्व उप प्रबंध निदेशक डीएन ठाकुर ने कहा कि सहकारी संस्थाओं को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए डिजिटल तकनीक, डेटा आधारित निर्णय, मजबूत वैल्यू चेन और तकनीक आधारित मूल्य संवर्धन को अपनाना आवश्यक है। इससे उत्पादकता बढ़ेगी और बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी।
पुस्तक को प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के संयुक्त सचिव डॉ. केके त्रिपाठी, ग्रामीण प्रबंधन संस्थान आनंद के पूर्व प्रोफेसर डॉ. हरेकृष्ण मिश्रा और सहकारिता नीति विशेषज्ञ डॉ. एसके वाडकर ने लिखा है। पुस्तक में सहकारी सिद्धांतों को आधुनिक प्रबंधन, सुशासन, डिजिटल बदलाव और संस्थागत सुधारों के साथ जोड़कर प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक नौ विषयगत अध्यायों में विभाजित है। इसमें सहकारी आंदोलन का विकास, नीतियां और कानूनी ढांचा, सदस्य-केंद्रित शासन व्यवस्था, सहकारी बैंकिंग, मानव संसाधन प्रबंधन, डिजिटल परिवर्तन और बहुउद्देश्यीय पैक्स की भूमिका जैसे विषय शामिल हैं।
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