Motihari News: पूर्वी चंपारण के केशरिया में निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर में स्थापित होने वाला विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग 42 दिनों की यात्रा पूरी कर तमिलनाडु से बिहार पहुंच गया. गोपालगंज में श्रद्धालुओं ने किया भव्य स्वागत.
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Motihari News: पूर्वी चंपारण जिले के केशरिया में निर्माणाधीन विश्व के सबसे बड़े विराट रामायण मंदिर को लेकर देशभर में उत्सुकता बढ़ती जा रही है. इसी कड़ी में मंदिर में स्थापित होने वाला विश्व का सबसे विशाल शिवलिंग अब बिहार पहुंच चुका है. तमिलनाडु से शुरू हुई इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक यात्रा ने 42 दिनों में हजारों किलोमीटर का सफर तय कर बिहार की धरती पर कदम रखा है. शिवलिंग के आगमन को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है और रास्ते भर इसे धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक के रूप में सम्मान दिया गया.
10 वर्षों की मेहनत से तैयार हुआ अद्भुत शिवलिंग
यह विशाल शिवलिंग तमिलनाडु के ऐतिहासिक शहर महाबलीपुरम में तैयार किया गया है, जिसे पत्थर की कलाकृतियों और प्राचीन स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है. करीब 10 वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद इस शिवलिंग का निर्माण पूरा हुआ है. काले ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित इस शिवलिंग में 108 शिवलिंग हैं. इसकी ऊंचाई 33 फीट, गोलाई 33 फीट और वजन करीब 210 मीट्रिक टन है. इसे बिहार लाने के लिए विशेष रूप से 96 चक्का वाले भारी ट्रेलर का इस्तेमाल किया गया.
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गोपालगंज में हुआ भव्य स्वागत
शनिवार को यह विशाल शिवलिंग उत्तर प्रदेश के रास्ते बिहार में गोपालगंज जिले की सीमा में प्रवेश किया. कुचायकोट प्रखंड के बलथरी चेकपोस्ट पर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने फूल-मालाओं के साथ भव्य स्वागत किया. इस दौरान पूजा-अर्चना की गई और शिवलिंग के दर्शन के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. कई श्रद्धालु इस ऐतिहासिक पल को यादगार बनाने के लिए सेल्फी लेते भी नजर आए.
कारीगर ने बताई निर्माण और यात्रा की कहानी
महाबलीपुरम से शिवलिंग के साथ आए कारीगर अरुण कुमार ने बताया कि महाबलीपुरम प्राचीन काल से स्ट्रक्चर और पत्थर कला के लिए प्रसिद्ध रहा है. उन्होंने बताया कि यह शिवलिंग 23 नवंबर को तमिलनाडु से रवाना हुआ था और 42 दिनों की लंबी यात्रा के बाद बिहार पहुंचा है. अब इसे केशरिया ले जाया जाएगा, जहां विराट रामायण मंदिर में इसकी स्थापना की जाएगी. यह शिवलिंग न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि भारत की प्राचीन स्थापत्य कला का भी अद्भुत उदाहरण होगा.
रिपोर्ट: मदेश तिवारी
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