प्राकृतिक खेती व खेत बचाओ अभियान पर जिला स्तरीय कार्यशाला – Live Hindustan

जलालगढ़, एक संवाददाता। भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के निर्देशानुसार कृषि विज्ञान केंद्र, जलालगढ़, जिला कृषि विभाग एवं आत्मा के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में प्राकृतिक खेती एवं खेत बचाओ अभियान जागरूकता कार्यक्रम के तहत एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए करीब 150 पुरुष एवं महिला किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सदर विधायक विजय कुमार खेमका थे। उनके साथ विधान परिषद सदस्य अनिल ठाकुर, भाजपा जिलाध्यक्ष संजीव कुमार सिंह, जिला किसान मोर्चा अध्यक्ष यादवेंद्र कुमार सिंह, भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुनील कुमार सिंह सहित कई जनप्रतिनिधि एवं कृषि विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. के.एम. सिंह ने की, जबकि मंच संचालन वैज्ञानिक डॉ. गोविंद कुंजर ने किया। मुख्य अतिथि विधायक विजय कुमार खेमका ने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने, रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने तथा कृषि विभाग की योजनाओं से जुड़कर उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि खेती की बढ़ती लागत को कम करने और मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने के लिए प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देना समय की मांग है। उन्होंने किसानों की समस्याओं को सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए.
अपने संबोधन में डॉ. के.एम. सिंह ने कहा कि भूमि संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। किसानों को रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ जैव उर्वरकों, हरी खाद और फसल विविधीकरण को अपनाना चाहिए, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहे और खेती की लागत में कमी आए। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती एवं खेत बचाओ अभियान एक से 30 जून तक जिले भर में निर्धारित कार्ययोजना के तहत चलाया जा रहा है। कार्यशाला में जानकारी दी गई कि पूर्णिया जिले में डीएपी खाद का अत्यधिक उपयोग हो रहा है, जिससे मृदा स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए किसानों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग के प्रति जागरूक किया जा रहा है। साथ ही मिट्टी के नमूने लेने की वैज्ञानिक विधि तथा मिट्टी जांच रिपोर्ट के आधार पर उर्वरकों के प्रयोग की जानकारी भी दी जा रही है.
आईसीएआर-आरसीईआर, पटना के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. गौस अली ने समेकित कृषि प्रणाली, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन, जैव उर्वरकों के उपयोग तथा मृदा उपचार के लाभों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों का समन्वय किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कार्यक्रम में जिला कृषि पदाधिकारी हरिद्वार प्रसाद चौरसिया, आत्मा के डिप्टी पीडी निखिल कुमार मिश्रा, सहायक निदेशक (रसायन) निशांत कुमार सहित अन्य अधिकारियों ने भी किसानों को संबोधित किया। कार्यशाला के सफल आयोजन में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों, कृषि विभाग के अधिकारियों, कृषि सखियों एवं कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। किसानों ने भी सक्रिय भागीदारी करते हुए प्राकृतिक खेती से जुड़े प्रश्न पूछे और विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त की.
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