मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। एक महिला अपने दो बच्चों और पति को छोड़कर इंस्टाग्राम पर बने प्रेमी के साथ फरार हो गई। इतना ही नहीं, महिला ने अपने प्रेमी के साथ 100 रुपए के स्टांप पेपर पर एक लिव-इन रिलेशनशिप एग्रीमेंट भी तैयार कराया है। इसमें उल्लेख किया गया है कि वह उसके साथ अपनी सहमति से रह रही है। एग्रीमेंट के अनुसार, दोनों एक-दूसरे पर शादी करने का किसी भी प्रकार का दबाव नहीं बना सकते।
पीड़ित पति मुकुंदी अहिरवार छतरपुर जिले के छापर गांव का रहने वाला है। उसकी एक 9 साल की बेटी और 4 साल का बेटा है। मुकुंदी मजदूरी का काम करता है। उसका कहना है कि कुछ समय पहले उसने अपनी पत्नी को एक स्मार्टफोन दिलाया था। इसके बाद वह इंस्टाग्राम पर वीडियो और रील्स बनाने लगी। इसी दौरान उसकी मुलाकात सत्यदेव चर्मकार से हुई और दोनों के बीच बातचीत बढ़ने लगी। मुकुंदी का आरोप है कि बाद में उसकी पत्नी उसे और दोनों बच्चों को छोड़कर सत्यदेव के साथ चली गई।
पीड़ित मुकुंदी अहिरवार का कहना है कि वह इस घटना से बेहद परेशान है। उसके अनुसार, जिस पत्नी की वह हर इच्छा पूरी करने की कोशिश करता था, उसने अचानक उसे छोड़ दिया। मुकुंदी ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय पहुंचकर एक शिकायती आवेदन दिया है। इसमें उसने पुलिस से अपनी पत्नी का पता लगाने की गुहार लगाई है। उसका यह भी कहना है कि यदि उसकी पत्नी सब कुछ भूलकर एक बार फिर उसके पास लौट आती है तो वह उसकी सभी गलतियों को माफ कर देगा।
मुकुंदी के अनुसार, पिंकी अहिरवार जिस युवक के साथ गई है वह उससे लगभग पांच साल छोटा है। उसने कहा कि वह बीती बातों को भुलाने के लिए तैयार है, बस उसकी पत्नी वापस लौट आए। इधर, पिंकी अहिरवार और सत्यदेव चर्मकार ने 100 रुपए के स्टांप पेपर पर एक लिव-इन रिलेशनशिप एग्रीमेंट तैयार कराया है, जिसमें दोनों ने अपनी सहमति से साथ रहने की बात कही है। एग्रीमेंट में यह भी उल्लेख किया गया है कि दोनों आपसी सहमति से संबंध में रहेंगे और भविष्य में शादी करने या शादी का दावा करने को लेकर कोई विवाद नहीं करेंगे।
सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह ‘लाइव हिन्दुस्तान’ में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के ‘डीडी न्यूज’ से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।
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