झील सुखाई, जंगल-नदी छाने और फिर भी नाकाम… 42 दिन बाद भी नहीं मिला बबीता पांडे का सुराग – AajTak

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क्या-क्या कोशिशें नहीं की गई. क्या-क्या तरीका नहीं अपनाएं. कैसे-कैसे और कहां-कहां नहीं ढूंढा गया. किन-किन चीजों से नहीं ढूंढा. पूरी महीने भर झील, नदी, पहाड़, जंगल, बस्ती सब छान मारा. पर कोई फायदा नहीं. 42 दिन बीत चुके हैं, पर 24 साल की एमबीए स्टूडेंट बबीता पांडे का कोई सुराग नहीं मिला. अब तो आलम ये है कि पुलिस प्रशासन ने भी एक तरह से हाथ खड़े कर लिए हैं. जिस जगह से 29 मई को बबीता गायब हुई थी. उस पूरे इलाके की तलाशी या सर्च ऑपरेशन पूरी तरह से अब रोक दिया गया है. अलबत्ता स्थानीय लोगों को अब भी पुलिस ने हिदायत दे रखी है कि कहीं से भी बबीता को कोई सुराग मिले तो पुलिस को बता दे. 
बबीता को ढूंढने की एक आखिरी कोशिश के तहत पुलिस प्रशासन ने दयारा बुग्याल की उस झील को भी पूरी तरह सुखा दिया, जिस झील में बबीता के डूबने का अंदेशा था. लेकिन उस खाली झील से भी बबीता के बारे में कोई सुराग नहीं मिला. अब दयारा बुग्याल से बाहर निकलकर उत्तराखंड पुलिस बबीता को ऋषिकेश, नैनीताल और दूसरी जगहों पर भी तलाश रही है. इस उम्मीद में कि अगर बबीता दयारा बुग्याल में नहीं है तो शायद कहीं और मिल जाए. 
बबीता की तलाश में उत्तराखंड पुलिस ने आसपास के सारे अपराधियों की भी कुंडली खंगाल डाली. कईयों को उठाकर पूछताछ की. पर यहां भी कोई सुराग नहीं मिला. उत्तरकाशी में तैनात पुलिस उपाधीक्षक (DSP) जनक सिंह पंवार ने कहा कि इस बीच कुछ मीडिया और सोशल मीडिया पर बबीता को लेकर कुछ ग़लत खबरें भी फैलाई जा रही हैं. उत्तराखंड पुलिस ने ऐसे लोगों को आगाह किया है कि वो अफवाह ना फैलाएं.
चलिए आपको बताते हैं, इस तलाश की पूरी कहानी. इसी साल मई का आखिरी सप्ताह था. ऊंची पहाड़ियां, उनसे टकराती ठंडी हवाएं. दूर-दूर तक पसरा अंधेरा. बबीता पांडे और उसके दोस्तों के लिए ये सब ट्रैकिंग का रोमांच था. ट्रैक दयारा बुग्याल पर वे तीनों एक टेंट लगाकर रात गुजारने के लिए रुके थे. लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ घंटों बाद यही रोमांच एक ऐसे रहस्य में बदल जाएगा, जो सबको हैरान कर देगा. ये एक ऐसी सच्ची कहानी है, जो पुलिस के लिए एक पहेली बन गई.
ट्रैक दयारा बुग्याल उत्तराखंड की वादियों में बसा है. उस ट्रैक का इनसेप्शन प्वाइंट यानी शुरुआती बिंदु है गांव रेथल. तकरीबन 21 किलोमीटर लंबे उस ट्रैक को नापने के लिए दुनिया भर के बीसियों पर्यटक हर साल उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में पहुंचते हैं. और इसे पूरा करने में तकरीबन 4 से 5 दिनों का वक़्त लगता है. रामनगर की रहने वाली 24 साल की एमबीए स्टूडेंट बबीता पांडेय भी अपने दो दोस्तों के साथ इसी एडवेंचर की तलाश में उत्तरकाशी के इस दयारा बुग्याल ट्रैक तक पहुंची थी.
29 मई 2026, ट्रैक दयारा बुग्याल
अभी ट्रैकिंग शुरू ही हुई थी कि बीच रास्ते से अचानक बबीता ऐसे गायब हो गई कि उसकी गुमशुदगी अब एक पहेली बन चुकी है. बबीता के गायब होने के बाद अगर पीछे कुछ बचा है, तो वो है बबीता का एक बैग जिसे वो लेकर ट्रैकिंग के लिए गई थी और एक आखिरी सीसीटीवी फुटेज, जो 28 मई को दिन में उत्तरकाशी के एक होटल के बाहर रिकॉर्ड हुई थी. उस सीसीटीवी में बबीता अपने दो दोस्तों के साथ दिखाई दे रही है.
फिलहाल, उसे गुम हुए 42 दिन गुजर चुके हैं, लेकिन बबीता का दूर-दूर तक कोई सुराग नहीं है. सवाल है आखिर उसके साथ क्या हुआ? वो कहां चली गई? आखिरी बार उसे कब और किसने देखा? क्या वो अपनी मर्जी से कहीं गई या फिर उसकी गुमशुदगी के पीछे कोई और वजह है? बबीता की गुमशुदगी की का राज क्या हो सकता है? और उसकी तलाश कहां तक पहुंची? इस बारे में हम आगे बात करेंगे.
लेकिन फिलहाल आइए बबीता के ट्रैकिंग के लिए घर से निकलने से लेकर गायब होने की इस पूरी कहानी को एक बार सिलसिलेवार तरीके से समझने की कोशिश करते हैं. बबीता 25 मई को उधमसिंह नगर से अपने दोस्तों के साथ निकली थी. इसके बाद वो अलग-अलग जगहों से घूमते हुए 28 मई को रैथल गांव पहुंचे. ट्रैकिंग पर जाने से पहले बबीता ने घरवालों को बताया था कि वो अपनी कुछ फीमेल फ्रेंड्स के साथ ट्रैकिंग पर जा रही है. चूंकि बबीता पहले भी कई बार ट्रैकिंग पर जा चुकी थी, घर वालों ने उसकी इस ट्रिप पर कोई ऐतराज भी नहीं किया.
लेकिन सच्चाई कुछ और थी. बबीता लड़कियों के साथ नहीं बल्कि दो लड़कों के साथ ट्रैकिंग के लिए गई थी और उसका सबूत उसकी गुमशुदगी के पहले के ये आखिरी सीसीटीवी फुटेज में क़ैद है. इनमें वो एक होटल के बाहर गाड़ी से उतरती हुई और कहीं जाते हुए नजर आ रही है. यहां बबीता के साथ दो लड़के भी देखे जा सकते हैं.
असल में रामनगर से निकल कर बबीता अपने इन्हीं दोस्तों के गांव रेथल पहुंची थी और यहां से तीनों ने ट्रैकिंग की शुरुआत करते हुए गोई तक का सफर पूरा किया था. गोई के बाद ही असली ट्रैकिंग की शुरुआत होती है. जानकारी के मुताबिक, बबीता और उसके दोस्तों ने गोई के पास ही एक टेंट लगाया था और रात को वहीं रुके थे. ये पूरा इलाका जंगलों से घिरा है, लेकिन सुबह होने पर जब बबीता के दोस्तों की आंखें खुली, तो उन्होंने देखा कि बबीता गायब थी. वो टेंट में नहीं थी.
हालांकि बबीता का बैग टेंट में ही रखा था. बबीता को गायब देख कर पहले तो उसके दोस्त भी घबरा गए और फिर उन्होंने पुलिस को इसकी खबर दी. बबीता को आखिरी बार देखने वाले उसके दोस्तों ने पुलिस की पूछताछ में ये स्वीकार किया है कि उस रात वो दोनों टेंट लगाने के बाद शराब पीने लगे थे. जिसके बाद बबीता कुछ देर के लिए टेंट से बाहर निकल गई थी. चूंकि वो शराब के नशे में थे, इसलिए उनकी आंख लग गई और उन्हें बबीता का ख्याल नहीं रहा. लेकिन जब अगले दिन उनकी आंख खुली, तो उन्हें बबीता गायब मिली.
बबीता सिर्फ एक चप्पल पहने हुई अपने मोबाइल फोन के साथ ही टेंट से बाहर निकली थी और गुम हो गई. पुलिस को बबीता की गुमशुदगी की जानकारी 30 मई की रात को मिली. चूंकि ये इलाका जंगली है और यहां जंगली जानवरों की भी मौजूदगी है, पुलिस ने लड़की को अपने तौर पर ढूंढने के साथ-साथ उसकी गुमशुदगी के बारे में वन विभाग को भी सूचित किया और तलाशी अभियान में एसओजी, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ की मदद ली. यहां तक पुलिस ने बबीता के पोस्ट वगैरह बना कर भी आस-पास के इलाकों में सर्कुलेट किया, ताकि अगर किसी को उसके बारे में कुछ पता हो तो वो पुलिस को बताएं.
लेकिन पुलिस की इस कोशिश का कोई भी असरदार नतीजा अब तक सामने नहीं आया है. फिलहाल, पुलिस ने इस सिलसिले में एफआईआर भी दर्ज कर ली है और बबीता के साथ आखिरी बार मौजूद दोनों लड़कों से पूछताछ कर रही है. लेकिन नतीजा सिफर है. अब सवाल ये है कि आखिर बबीता की गुमशुदगी के पीछे क्या-क्या संभावित वजह हो सकती है? 
तो तफ्तीश में पुलिस उन सारी वजहों को एक्सप्लोर कर रही है. अव्वल तो यही है कि बबीता किसी को बताए बगैर खुद ही अपनी मर्जी से कहीं चली गई हो. दूसरा ये कि बबीता के साथ ट्रैकिंग पर गए दोस्त झूठ बोल रहे हों और उन्होंने ही बबीता को कहीं गायब कर दिया हो. तीसरा ये कि वो टेंट के बाहर निकलने पर कोई जंगली जानवर उसे उठा ले गया हो. चौथा ये कि वो या तो जंगलों में रास्ता भटक गई हो या फिर उसके साथ कोई और अनहोनी हुई हो. इन्ही आशंकाओं के मद्देनजर 150 लोगों से ज्यादा लोगों का लवाजमा बबीता को ढूंढने में लगा है. पुलिस के साथ-साथ, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, एसओजी, आईटीबीवी, वन विभाग, डॉग स्क्वॉयड, ड्रोन सर्चिंग टीम और यहां तक कि गोताखोर भी बबीता की तलाश कर रहे हैं.
इस बीच जिला प्रशासन ने गोई के पास मौजूद एक झील की गहराई को नापने का फैसला किया और इसके लिए खास तौर पर गोताखोरों की टीम बुलाई गई. वैसे भी अगर खुदा न खास्ता बबीता किसी जंगली जानवर का शिकार बनी होती, तो फिर उसके कुछ ना कुछ निशान अब तक की तलाशी में जरूर नजर आते. ऐसे में अब ये भी शक होने लगा कि कहीं बबीता गलती से झील के पानी में तो नहीं गिर गई. इसी के बाद लगभग 9 फीट गहरी झील को भी खंगाला गया, लेकिन बबीता का कोई सुराग नहीं मिला.
फिर से बबीता की तलाश शुरू हुई, तो पहले ही कदम पर शासन प्रशासन और खास कर उत्तरकाशी के पर्यटन विभाग की घोर लापरवाही और पर्यटन के नाम पर धंधेबाजी का खुलासा हो गया. असल में ट्रैकिंग के लिए जाने वाले हर पर्यटक के बारे में एक्सप्लोर उत्तरकाशी नाम की एक वेबसाइट में पहले जानकारी दर्ज करवानी होती है. ताकि पर्यटन विभाग के पास हर सैलानी की जानकारी मौजूद रह सके.
लेकिन जब बबीता की गुमशुदगी के बाद पर्यटन विभाग ने अपने तौर पर उसका ब्यौरा खंगालना शुरू किया, तो देखा कि बबीता और उसके नाम से तो उनके डॉक्यूमेंट्स में कोई एंट्री ही नहीं है और जो एंट्री हुई है वो भी फेक है. इसके साथ ही डॉक्यूमेंटेशन के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वाले ट्रैवल एजेंसी का लाइंसेस पर्यटन विभाग ने सस्पेंड कर दिया था. 
फिलहाल, बबीता के घर वाले इस मामले इस उम्मीद में हैं कि आने वाले दिनों में बबीता का कोई पता चले और ये इंतजार खत्म हो. बबीता दो भाइयों की इकलौती बहन थी और घर वाले उसकी गुमशुदगी से सदमे में हैं. अपनी बेटी के गायब हो जाने से सबसे ज्यादा सदमे में बबीता की मां है. उन्हें बबीता ने ये बताया था कि वो अपनी सहेलियों के साथ उत्तरकाशी घूमने जा रही है. लेकिन यहां आकर उन्हें पता चला कि वो सहेलियों के साथ नहीं बल्कि दो लड़कों के साथ घूमने आई थी. जाहिर है ये रहस्य भी उन्हें परेशान करता रहा.
अब तक की तफ्तीश में सामने आई जानकारी के मुताबिक 29 मई की रात बबीता के मोबाइल फोन की लोकेशन करीब 12 बजे तक गोई में ही थी. इसके बाद उसका फोन स्विच्ड ऑफ हो गया. जबकि बबीता के साथियों ने अगले दिन यानी 30 मई की रात करीब साढ़े सात-आठ बजे पुलिस को बबीता की गुमशुदगी की जानकारी दी. सवाल है कि पुलिस को इत्तिला देने में इतनी देर क्यों हुई? गोई में जहां बबीता और उसके दोस्त टेंट में ठहरे हुए थे, क्या वहां बबीता और उसके दोस्तों के अलावा और ट्रैकर भी टेंट में रुके हुए थे? अगर हां, तो वो कौन थे? क्या उनसे इस बारे में पूछताछ हुई? जिस तरह से पर्यटकों के रजिस्ट्रेशन के मामले में घपले की बात सामने आई है, उसे देखते हुए लगता है कि पुलिस सारे पर्यटकों को शायद ही ट्रेस कर पाएगी. ऐसे में बबीता पांडे की गुमशुदगी पुलिस के लिए एक बड़ी मिस्ट्री बन गई है.
(लीला सिंह बिष्ट के साथ ओंकार बहुगुणा का इनपुट) 
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