मुंबई. महाराष्ट्र की सियासत में इन दिनों नया भूचाल आया हुआ है. फडणवीस सरकार ने जबसे प्रदेश के स्कूलों में हिन्दी भाषा को तीसरी भाषा के तौर पर पढ़ाने का फैसला किया है, तबसे महाराष्ट्र की राजनीति गर्मा गई है. अब हिन्दी भाषा विवाद की छाया महायुति सरकार पर भी दिखने लगी है. इससे पहले उद्धव और राज ठाकरे की ओर से संयुक्त तौर पर आंदोलन करने की बात कही जा चुकी है. अब महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार ने भी इस मसले पर अपने पत्ते खोले हैं. महायुति गठबंधन में भी अब इसपर अलग राय देखी जा रही है. एनसीपी नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने प्रदेश के स्कूलों में पहली कक्षा से हिन्दी भाषा को पढ़ाने का आदेश लागू करने के पक्ष में नहीं हैं. ऐसे में इस मसले पर फडणवीस सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.
हिन्दी भाषा को लेकर महायुति में भी अलग अलग राय दिख रही है. NCP नेता और डिप्टी सीएम अजीत पवार महाराष्ट्र में क्लास 1st से हिंदी भाषा को तीसरी भाषा के तौर पर लागू करने के समर्थन में नहीं हैं. अजीत पवार ने कहा कि महाराष्ट्र के स्कूलों में पहली कक्षा से ही हिन्दी भाषा नहीं होनी चाहिए. इसे क्लास 5th से शुरू की जानी चाहिए . उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर वे महारार्ष्ट कैबिनेट में चर्चा करेंगे. वहीं, दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे इस मुद्दे पर 5 जुलाई को मुंबई में एक बड़ी रैली साथ में निकाल रहे हैं. इस तरह इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की दिक्कतें बढ़ सकती हैं.
अजित पवार ने साफ शब्दों में कहा कि हमारा मानना है कि हिंदी की पढ़ाई पांचवीं कक्षा से शुरू होनी चाहिए. पहली कक्षा से हिंदी थोपने की कोई जरूरत नहीं है. उन्होंने यह भी साफ किया कि हर राज्य में बच्चों को अपनी मातृभाषा सीखने पर जोर देना चाहिए. मराठी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाने का आदेश दिया गया था, लेकिन यह तभी लागू होगा जब कक्षा में कम से कम 20 छात्र वैकल्पिक भाषा न चुनें. बारामती में अजित पवार ने कहा कि हिन्दी को पहली कक्षा से लागू करने की कोई मजबूरी नहीं है. इस मुद्दे पर रविवार को कैबिनेट बैठक में चर्चा होगी, जो विधानसभा के मानसून सत्र से पहले होगी.
महाराष्ट्र में दो दशक के बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक मंच पर दिखेंगे. तीन भाषा फॉर्मूल के तहत महाराष्ट्र के स्कूलों में हिंदी अनिवार्य किए जाने के फैसले के खिलाफ दोनों भाई 5 जुलाई को विरोध मार्च में 20 साल बाद एक साथ नजर आएंगे. शिवसेना के नेता संजय राउत ने इसकी पुष्टि की है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि महाराष्ट्र के स्कूलों में हिंदी अनिवार्य करने के खिलाफ एकजुट मोर्चा बनाया जाएगा. एक अन्य पोस्ट में उन्होंने एकजुट मार्च के बारे में बताते हुए राज और उद्धव की एक पुरानी तस्वीर शेयर की, जिसमें दोनों आसपास बैठे बातें कर रहे हैं. इसके साथ उन्होंने लिखा, ‘ठाकरे ही ब्रांड हैं.’