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free residential education: शिक्षा विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल छोड़ चुके बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए 'मॉडल स्कूल' योजना शुरू की है। …और पढ़ें
बच्चों को आवासीय सुविधा देकर नियमित पढ़ाई से जोड़ा जाएगा। फाइल फोटो
सुमंत कुमार, पिपरासी (पश्चिम चंपारण)। Bihar Model School Scheme: ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की मुख्यधारा से कट चुके बच्चों को फिर से स्कूल तक लाने के लिए बिहार सरकार एक नई ‘मॉडल आवासीय विद्यालय व्यवस्था’ लागू करने जा रही है।
इस योजना के तहत बच्चों को रहना, खाना, कॉपी, किताब और पढ़ाई- सबकुछ पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का फोकस उन बच्चों पर है, जो आर्थिक या सामाजिक कारणों से स्कूल छोड़कर बकरी-गाय चराने, घरेलू काम या अन्य गतिविधियों में समय बिता रहे हैं।
ऐसे बच्चों को विद्यालय परिसर में ही आवासीय सुविधा देकर नियमित पढ़ाई से जोड़ा जाएगा। इसके लिए विशेष शिक्षकों की तैनाती भी की जाएगी, ताकि कमजोर शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले बच्चे भी तेजी से आगे बढ़ सकें।
इस महत्वाकांक्षी योजना पर होने वाले कुल खर्च का 70 प्रतिशत केंद्र सरकार और 30 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी। शिक्षा विभाग ने इस दिशा में तैयारियां तेज कर दी हैं।
प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि बगहा अनुमंडल स्तर पर दो और प्रखंड स्तर पर दो ऐसे विद्यालयों का चयन किया जाए, जहां पर्याप्त भूमि उपलब्ध हो।
चिन्हित विद्यालयों को मॉडल स्कूल का दर्जा देकर वहां अत्याधुनिक छात्रावास का निर्माण कराया जाएगा। गंडक पार के प्रखंडों में उपयुक्त विद्यालय और भूमि की पहचान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। विभाग को उम्मीद है कि नए साल से बच्चों को इसका लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।
मॉडल आवासीय विद्यालयों में कक्षा 6 से 12 तक के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दी जाएगी। यहां बच्चों के लिए सुरक्षित आवास, पौष्टिक भोजन, शिक्षण सामग्री और सतत निगरानी की पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। लक्ष्य यह है कि पढ़ाई से दूर हो चुके बच्चों को एक सुरक्षित माहौल में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
पिपरासी के अंचलाधिकारी शशिकांत यादव ने बताया कि यदि आवासीय भवन के लिए अतिरिक्त भूमि की जरूरत पड़ी, तो सरकारी भू-खंड उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं पिपरासी व मधुबनी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी उमेश कुमार ने बताया कि उत्क्रमित मध्य विद्यालय परसौनी और उत्क्रमित मध्य विद्यालय सुजनही घोड़हवा को मॉडल विद्यालय के लिए चिन्हित किया गया है। इस संबंध में जिला स्तर पर रिपोर्ट भेज दी गई है।
इस योजना के लागू होने से उम्मीद की जा रही है कि बड़ी संख्या में ड्रॉपआउट बच्चे दोबारा स्कूल लौटेंगे और ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था में एक नया बदलाव देखने को मिलेगा।