सिंचाई विभाग और खनन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की करतूत देवरिया-फुसलौना के ग्रामीणों को भारी पड़ सकता है। गोमती नदी के किनारे नो कंस्ट्रक्शन जोन से बड़ी मात्रा में खोदी गई मिट्टी से उन पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। साथ ही मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचने से वह राहत भी महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों को न सिर्फ दोषियों को सजा मिलने की उम्मीद है, बल्कि बाढ़ के संकट से उबारने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाये जाने का भी भरोसा है। गोमती नदी के तट से किसान पथ गुजरा है। पास में ही इंदिरा डैम भी है। नदी के किनारे से किसान पथ के पिलर के पास तक गहरा गड्ढा कर दिया गया है।
इससे पिलर को नुकसान होने की आशंका बढ़ गई है। सीधी खोदाई होने से बाढ़ में मिट्टी कटान हुई तो पिलर को भी नुकसान पहुंच सकता है। नदी के किनारे से 11 हजार 25 घनमीटर मिट्टी खनन की पुष्टि होने के बाद से देवरिया-फुसलौना गांव के लोग डरे हुए हैं।गांव के विशाल पाण्डेय का कहना है कि बारिश के समय नदी में जलस्तर बढ़ने पर गांव में पानी पहुंचने का खतरा बढ़ गया है। घरों में पानी भर सकता है। पास के गांव सिकंदरपुर के कौशल यादव ने इसे सिंचाई विभाग के अधिकारियों की मिलभगत बताया। उन्होंने कहा कि उनके गांव का रास्ता देवरिया-फुसलौना से होकर ही जाता है। बारिश के मौसम में बड़ी मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है। यहां पर प्लाटिंग भी हो रही है। कई लोग मकान बनवाकर रहने लगे हैं। उनके घरों में बाढ़ का पानी भरने का खतरा है। मुख्यमंत्री के संज्ञान में मामला आने से अब दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ बाढ़ के संकट से उबारने के लिए कोई कदम जरूर उठाये जाने की संभावना है। भाजपा नेता अक्षय मौर्य ने कहा कि न सिर्फ गांव में पानी भरेगा, बल्कि किसान पथ के पिलर को भी खतरा है। इस अवैध खनन में कई बड़े लोग शामिल है।
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