सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि पूरे भारत में जंगलों को बचाने की जरूरत है। अदालत ने कहा कि झारखंड जैसे कुछ राज्यों में प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र हैं जिन्हें सहेजकर रखना जरूरी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जेएसपीसीबी) की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान ये टिप्पणियां कीं। पीठ ने जेएसपीसीबी की ओर से पेश वकील से कहा कि कुछ ही राज्य ऐसे हैं, जहां हम सचमुच अपने प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को बचा सकते हैं और आप (झारखंड) उनमें से एक हैं। पीठ ने कहा कि कुछ राज्यों में जंगल जैसी प्राकृतिक सुंदरता वाली जगहें हैं, जिन्हें बचाने की जरूरत है।
शीर्ष अदालत झारखंड हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। हाईकोर्ट ने अप्रैल में जंगलों या वन भूमि की सीमाओं के पास पत्थरों के उत्खनन या पत्थर तोड़ने वाली मशीनें स्थापित करने के लिए मंजूरी के सिलसिले में कई दिशा-निर्देश जारी किए थे। जनवरी में हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि राज्य के भीतर संरक्षित वनों की तय सीमाओं से एक किलोमीटर के दायरे में पत्थर के उत्खनन या पत्थर तोड़ने वाली मशीनें स्थापित करने के लिए कोई मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए।
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